सर्वोच्च न्यायालय ने आज बैंकों को ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) की धारा 12ए के तहत शिवा इंडस्ट्रीज द्वारा की गई निपटारे की पेशकश पर आगे बढ़ने की मंजूरी दे दी। यह धारा कर्ज चुकाने में चूक करने वाली कंपनी के प्रवर्तकों को निपटारे की पेशकश लाने की इजाजत देती है, बशर्ते ऋणदाताओं की समिति के 90 फीसदी सदस्यों को पेशकश मंजूर हो।
सर्वोच्च न्यायालय ने आज अपने आदेश में फिर कहा कि वह पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आईबीसी की धारा 12ए संवैधानिक कसौटी पर खरी उतरती है। उसने यह भी कहा था आईबीसी के तहत ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) की वाणिज्यिक समझ को सबसे ऊपर मानना चाहिए और उसमें किसी तरह का कानूनी दखल नहीं होना चाहिए। अदालत ने कहा, ‘कहा जा चुका है कि वित्तीय ऋणदाताओं को ऋणी कंपनी और प्रस्तावित समाधान योजना की व्यवहार्यता के बारे में पता होता है। वे प्रस्तावित समाधान योजना की व्यापक पड़ताल और अपने विशेषज्ञों के आकलन के आधार पर काम करते हैं।’
अदालत ने कहा कि जब 90 फीसदी या उससे अधिक ऋणदाताओं को लगता है कि निपटारे को मंजूरी देना सभी भागीदारों के हित में रहेगा और इसीलिए वे दिवालिया प्रक्रिया वापस ले लेते हैं तो न्यायिक प्राधिकरण या अपीलीय प्राधिकरण उनकी वाणिज्यिक समझ पर सवाल कर अपील पर कुंडली मारकर नहीं बैठ सकते। अदालत ने कहा कि दखल की जरूरत तभी होगी, जब न्यायिक प्राधिकरण या अपीलीय प्राधिकरण सीओसी के फैसले को पूरी तरह अस्थिर, मनमाना या बेतुका पाएगा।
शिवा इंडस्ट्रीज के मामले में सीओसी ने प्रवर्तक वल्लाल आरसीके की निपटारे की योजना को 94.2 फीसदी मतों से मंजूरी दे दी। वल्लाल आरसीके उद्यमी सी शिवशंकरन के पिता हैं। कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि हालांकि 12ए के मामलों को पहले भी ऋणदाताओं ने मंजूरी दी थी। लेकिन शिवा इंडस्ट्रीज का मामला मुकदमेबाजी में इसलिए फंस गया क्योंकि एनसीएलटी ने पेशकश को बहुत कम माना और सीओसी की मंजूरी के बावजूद इसे खारिज कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सीओसी की वाणिज्यिक समझ को आवश्यक महत्त्व नहीं देने में न एनसीएलटी और न ही एनसीएलएटी सही हैं। अदालत ने वल्लाल की निपटारे की योजना को मंजूरी देते हुए कहा, ‘अदालत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि आईबीसी के ढांचे में एनसीएलएटी और एनसीएलटी को कम से कम न्यायिक दखल देना चाहिए।’
शिवा इंडस्ट्रीज ऐंड होल्डिंग्स के प्रवर्तक 94 वर्षीय वल्लाल आरसीके ने कहा कि कंपनी में नया प्रबंधन नियुक्त होगा।
कंपनी का नया प्रबंधन जल्द से जल्द अपने ऋणदाताओं का कर्ज निपटाने पर ध्यान देगी ताकि कंपनी का नया अध्याय शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘मैं सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से खुश हूं और इसकी सराहना करता हूं।’ संयुक्त अरब अमीरात की परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी मसदार ऐंड आईएआरसी ने शिवा इंडस्ट्रीज के 5,000 करोड़ रुपये के कर्ज में 40 फीसदी हिस्सा लिया है। इसमें से आईडीबीआई बैंक की अगुआई वाले पीएसयू बैंकों का 3,442 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है।
शिवा इंडस्ट्रीज को दिवालिया अदालत में 5 जुलाई 2019 को ले जाया गया था। रॉयल पार्टनर्स इन्वेस्टमेंट फंड की एक पेशकश बहुत कम रकम की होने के कारण खारिज कर दिया गया था। इसके बाद समाधान पेशेवर ने एनसीएलटी रजिस्ट्री के समक्ष परिसमापन याचिका दायर की। लेकिन वल्लाल ने 31 अगस्त 2020 को एनसीएलटी, चेन्नई में एक याचिका दायर की। उन्होंने सीओसी से एकबारगी निपटारे की पेशकश पर विचार करने को कहा।