दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स कॉर्पोरेशन इन दिनों भारत में विस्तार की राह पर है। कंपनी लगातार नए उत्पाद उतार रही है और छोटी कारों के बाजार में तेजी से आगे बढ़ रही है।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भी जनरल मोटर्स तमाम चुनौतियों से लड़ने के लिए कई रणनीति अपना रही है। कंपनी के अध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी फ्रित्ज ए हेंडरसन से ऋषभ कृष्ण सक्सेना ने इन्हीं मसलों पर बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश :
पिछले दिनों कहा गया था कि जनरल मोटर्स कार बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी नहीं रहेगी। जापान की कंपनी टोयोटा उससे यह जगह छीनने वाली है। इस बारे में आपने क्या सोचा है?
इस तरह की गिनती में हम यकीन नहीं करते। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी होने के बजाय हमें हर देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड बनने में दिलचस्पी है। हम एक के बाद एक बाजार में ज्यादा हिस्सेदारी पर नजर गड़ा रहे हैं। इसलिए टोयोटा या किसी भी दूसरी कंपनी से हमें कोई वास्ता नहीं।
आपके कहने का मतलब है कि इस फेहरिस्त में बहुत पिछड़ने पर भी आपको अफसोस नहीं होगा?
बाजार में ज्यादा हिस्सेदारी अपने आप हमें पहले नंबर पर कायम रखेगी। दरअसल हम मुनाफा कमाने के लिए बाजार में उतरे हैं। हमें राजस्व, मुनाफा और नकदी प्रवाह से मतलब है। हमारा मकसद किसी फेहरिस्त में पहले नंबर पर रहना नहीं, बल्कि वित्तीय सफलता हासिल करना है और इस मकसद में हम कामयाब हो रहे हैं।
लेकिन अमेरिका, जहां आपकी तूती बोलती थी, की हालत तो अच्छी नहीं है। आपको इस बार वहां कितनी बिक्री की उम्मीद है?
हाउसिंग, क्रेडिट और तेल संकट के बीच हमें नहीं लगता कि हम 1.6 या 1.5 करोड़ वाहन बेच पाएंगे। इस बार बिक्री का आंकड़ा 1.4 करोड़ के आसपास रहने की उम्मीद है।
भारत से आपको इस साल क्या उम्मीद है?
हमारे लिए भारत बेहद अहम बाजार है। हमें उभरते बाजारों से बड़ी उम्मीद है। खास तौर पर भारत, चीन, रूस और ब्राजील हमारे लिए ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं। भारत को हम धीरे-धीरे एशिया में अपना बड़ा केंद्र बनाने पर काम कर रहे हैं। यहां के बाजार में हमारी 4 फीसद हिस्सेदारी है और इसमें अच्छा खासा इजाफा किया जाएगा।
इसके लिए आप कौन से रास्ते अख्तयार कर रहे हैं?
सबसे पहले तो हम भारत के मुताबिक उत्पाद उतार रहे हैं। मिसाल के तौर पर टवेरा को ही लीजिए। यह पूरी तरह भारत की सड़कों के लिए बनाई गई है। तालेगांव का हमारा संयंत्र आप जानते ही हैं। हम उसमें विस्तार भी कर रहे हैं। आने वाले कुछ समय में भारत से हम बड़ी तादाद में कारें निर्यात भी करेंगे।
तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में कार निर्माताओं के सामने क्या चुनौतियां हैं?
सबसे बड़ी चुनौती तो तेल की कीमत ही है। मुझे लगता है कि कीमतों में चढ़ाव का यह दौर लंबा चलेगा। हमें वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ेगा। इस पर हम शोध कर रहे हैं।
आपको भविष्य में किस तरह के वैकल्पिक ईंधन की संभावना नजर आ रही है?
जनरल मोटर्स तो तमाम तरह के विकल्पों का एक साथ इस्तेमाल पसंद करती है। हम इलेक्ट्रिक कार के बारे में सोच रहे हैं और एथेनॉल या फ्यूल सेल के बारे में भी। मुझे लगता है कि हर देश में अलग-अलग ईंधन के लिए जगह होगी।
मिसाल के तौर पर यूरोप और अमेरिका में एथेनॉल को पेट्रोल की जगह इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन ब्राजील में ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि वहां वहां एथेनॉल गन्ने से बनता है और चीनी भी, जो वहां की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। इसी तरह भारत में जैट्रोफा पर काम हो रहा है।
हमर ब्रांड की बिक्री की बात कहां तक आगे बढ़ी है? यह सौदा कब तक पूरा हो जाएगा?
अभी कई कंपनियों से बात चल रही है। हम यह काम जल्द पूरा करना चाहते हैं, लेकिन कुछ वक्त तो लगेगा।
इस ब्रांड को कंपनी क्यों बेचना चाहती है?
इससे हमें मुनाफा नहीं हो रहा था और जिससे मुनाफा न हो, जनरल मोटर्स को उससे कोई मतलब नहीं होता। इससे मिली रकम का इस्तेमाल कहीं और होगा और लागत भी कम होगी, जो हमारी प्राथमिकता है।
लागत कम करने के लिए आप और क्या कर रहे हैं?
हम अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर रहे हैं। वेतन और भत्ते कम हुए हैं। प्रौद्योगिकी बेहतर कर लागत कम की जा रही है। इसके जरिये हम 1,000 करोड़ डॉलर बचाएंगे। इसके अलावा हमर ब्रांड और दूसरी संपत्तियों की बिक्री से 500 करोड़ डॉलर बचाए जाएंगे।