लौटने लगी उद्योगों की रंगत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 9:01 PM IST

पिछले दो महीनों में फीके प्रदर्शन के बाद जुलाई महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) विकास दर सुधरकर 7.1 फीसदी हो गई, जिसकी वजह से पूंजी और टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र में विकास हुआ है।


जून महीने में आईआईपी विकास दर 5.4 फीसदी थी। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 8.3 फीसदी थी। लेकिन महंगाई बढ़ने और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीतियों में सख्ती करने की वजह से ब्याज दर में इजाफा हुआ। यही वजह रही कि उद्योगों के लिए कर्ज लेना मुश्किल हो गया।

साथ ही इस अवधि में मांग में भी कमी देखी गई। आरबीआई ने जून और जुलाई महीने में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी। टिकाऊ उपभोक्ता माल का उत्पादन,जिसमें कुछ महीने पूर्व गिरावट देखी जा रही थी, वह बढ़कर 11.2 फीसदी हो गया। 

आईआईपी में 80 प्रतिशत का योगदान रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर जुलाई में 7.5 फीसदी रही, जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में 8.8 फीसदी थी। वहीं बिजली उत्पादन की विकास दर 4.5 फीसदी रही, जो पहले 7.5 फीसदी थी।

खनन उत्पादन की विकास दर 5 फीसदी थी जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में 3.2 फीसदी थी।  औद्योगिक विकास दर मई में 3.8 फीसदी और जून में 5.4 फीसदी रही। अप्रैल में औद्योगिक विकास दर 7 फीसदी रही, जो जुलाई के विकास दर के ही बराबर है।

First Published : September 13, 2008 | 1:30 AM IST