उड़ीसा में छोटे उद्योगों की बदलेगी तकदीर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 9:02 PM IST

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने तकरीबन 1063 करोड़ रुपये के नेशनल मैन्युफेक्चरिंग कम्प्टीटिवनेव प्रोग्राम (एनएमसीपी) नामक कार्यक्रम की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है।


इस कार्यक्रम को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) आधार पर 10 सेगमेंट में 11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि के दौरान सिलसिलेवार ढंग से क्रियान्वित किया जाएगा। प्रत्येक सेगमेंट के क्रियान्वयन के लिए 80 फीसदी राशि का वहन सरकार की ओर से और बाकी 20 फीसदी का निजी पार्टियों की ओर से वहन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पूरे देश में एमएसएमई को बढ़ावा देना है। इसके तहत देश में प्राथमिक निर्माण, रिटेल और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम के लिए एमएसएमई की ओर से जिन 10 सेगमेंट की पहचान की गई है, वे हैं – बार कोड मैकेनिज्म के लिए बाजार समर्थन, उद्यमशीलता और प्रबंधकीय इन्क्यूबेटरों के लिए सहायता, निर्माण गुणवत्ता उपकरण (क्यूएमएस  क्यूटीटी), बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के निवेश के लिए अभियान, क्लस्टर डेवलपेमंट इनीशिएटिव (सीडीआई) के तहत लीन निर्माण कार्यक्रम (लीन), मिनी टूल रूम प्रोग्राम (एमटीआर), आईसीटी को प्रोत्साहन देना, ऊर्जा दक्षता एवं गुणवत्ता प्रमाणन (एनर्जी), डिजाइन क्लीनिक स्कीम, प्रौद्योगिकी उन्नयन गतिविधियों के साथ एसएमई को विपणन सहायता।

बार कोड सेगमेंट के लिए 1.5 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा वहीं इन्क्यूबेटर्स के लिए 80 करोड़ रुपये, क्यूएमएसक्यूटीटी के लिए 50 करोड़ रुपये, आईपीआर के लिए 55 करोड़ रुपये, लीन कार्यक्रम के लिए 230 करोड़ रुपये, एमटीआर के लिए 350 करोड़ रुपये, आईसीटी के लिए 100 करोड़ रुपये, एनर्जी के लिए 93.5 करोड़ रुपये, कॉमन डिजाइन सेंटर (सीडीसी) के लिए डिजाइन पर 50 करोड़ रुपये और मार्केटिंग पर 53 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

एमएसएमई टूल्स देश के युवाओं को तकनीकी कौशल मुहैया कराने के साथ-साथ पूरे देश में बेरोजगारी के भयावह मुद्दे को सुलझाने में भी मदद मिलेगी। विकास संस्थान सिंगुलर टूल रूम्स के तौर पर अपनी मजबूत पहचान पहले ही बना चुके हैं।

1000 करोड़ रुपये के इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन का मुख्य फोकस क्लस्टर डेवलपमेंट इनीशिएटिव (सीडीआई) पर आधारित है जिसे संयुक्त राष्ट्र प्रायोजित संस्थाओं की मदद से विभिन्न राज्यों में चलाया जा रहा है। उड़ीसा में एमएसएमई टूल रूम चिकित्सकीय अध्ययन, ट्रस्ट निर्माण, कार्य योजना, क्रियान्वयन एवं निगरानी और मूल्यांकन के लिए यूनिडो के साथ पहले ही करार कर चुका है।

उड़ीसा के एमएसएमई टूल रूम ने एनएमसीपी के तहत लीन की निर्माण अवधारणा को क्रियान्वित करने का फैसला किया है जिससे उत्पादकता बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मोर्चे पर एसएमई क्षेत्र को मदद मिलेगी। उड़ीसा सीटीटीसी के महा प्रबंधक सिबसीस मैती कहते हैं, ‘हमने राज्य में 5-6 अतिरिक्त क्लस्टर स्थापित करने की योजना बनाई है।

उड़ीसा में पहले से तीन प्रमुख क्लस्टर बेल मेटल, फार्मास्युटिकल्स और मशीन फैब्रिकेशन मौजूद हैं। ये क्लस्टर बैलाकाटी, कटक और राउरकेला में मौजूद हैं।’ योजना के मुताबिक लीन मैन्युफेक्चरिंग सेगमेंट के तहत पूरे देश में तकरीबन 1000 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे जिन पर तकरीबन 230 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

पहले चरण के तहत 2008-09 तक सीडीआई में 100 क्लस्टर तैयार किए जाएंगे और बाकी 900 क्लस्टर 2011-12 तक विकसित हो जाएंगे। प्रत्येक क्लस्टर पर औसत रूप से तकरीबन 30 लाख रुपये का निवेश किया जाएगा जिसमें से 24 लाख रुपये का भुगतान सरकार करेगी और 6 लाख रुपये निजी पार्टियों की ओर से लगाए जाएंगे।

लीन मैन्युफेक्चरिंग प्रोग्राम उस कचरे को कम करने के लिए चलाया जा रहा है जो विभिन्न क्षेत्रों में एमएसएमई के संचालनों के दौरान पैदा हुआ है। मैती कहते हैं, ‘इससे कचरे में कटौती करेगा और साथ ही इससे आईएसओ 9001, 14000 और 18000 जैसी गुणवत्ता प्रणाली के मोर्चे पर भी सुधार आएगा।’

First Published : September 14, 2008 | 10:42 PM IST