पिछले चार महीनों के दौरान विमानों को किराए पर देने के बाजार में भी वैश्विक तौर पर 15-20 फीसदी तक की कमी आई है।
इस गिरावट से जूझ रही भारतीय एयरलाइंस अपनी उड़ानें घटाने के लिए विमानों को अन्य कंपनियों को सब-लीज पर देने की कोशिश कर रही हैं। इस साल विमानन उद्योग को 8600 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है।
विमानन कंपनियों ने क्षमता में कटौती करने और उड़ानों की संख्या घटाने के लिए अन्य उपाय तलाशने शुरू कर दिए हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने अपने मौजूदा विमानों को अन्य कंपनियों को सब-लीज पर देने का रास्ता तलाशा है। विमानन कंपनियां उन एयरलाइंस को खोज रही हैं जो जल्द से जल्द ऐसे विमान चाहते हैं, जिसमें पायलट और चालक दल के अन्य सदस्य भी पहले से ही मौजूद हों।
सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन के मुख्य कार्यकारी (भारतीय उप-महाद्वीप और पश्चिम एशिया) कपिल कौल ने कहा, ‘विमानन बाजार में मांग और आपूर्ति समीकरण में बदलाव आया है। मांग में कमी आने की वजह से अभी तक 25 विमानन कंपनियां परिचालन बंद कर चुकी हैं और दुनिया भर में एयरलाइंस क्षमता में कमी ला रही हैं। इसका प्रमुख कारण लीज समझौते के तहत किराये में 15-20 फीसदी तक की कमी आना भी है और चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में इसमें और गिरावट आ सकती है।’
यात्रियों की संख्या में वैश्विक तौर पर कमी आने से कंपनियां अपनी क्षमता में कटौती के लिए मजबूर हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय विमानों को लीज पर उपलब्ध कराने वाली कंपनी वेलिंग के महा प्रबंधक अमित मित्तल का कहना है, ‘वसूली में कमी आने के कारण विमानन कंपनियां अपने रूटों में फेर-बदल कर रही हैं। पहले जहां एयरलाइन एक विमान का 10-12 घंटे तक इस्तेमाल करती थी, वहीं अब इसे 6-7 घंटे तक इस्तेमाल कर रही हैं।’
इस वक्त विमानन कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विमानों को सब-लीज पर देने के लिए एयरलाइन की तलाश करना है। दिल्ली की सस्ती दर पर विमानन सेवा मुहैया कराने वाली स्पाइसजेट के बेड़े में इस साल के अंत तक पांच बोइंग 737 शामिल होंगे। अगर कंपनी अपने विमानों को सब-लीज पर देने के लिए एयरलाइन की तलाश नहीं कर पाती है तो उसे इन विमानों की डिलीवरी को टालना पड़ेगा।
स्पाइसजेट के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, ‘बोइंग 737 जैसे एक विमान का किराया 3.50-3.60 लाख रुपये प्रति माह है, जो मौजूदा समय में घट कर 3.20 लाख रुपये के आसपास रह गया है। एयरलाइनों को सब-लीज के तौर पर 5 से 10 फीसदी की रकम मिलती है। लेकिन फिलहाल कोई भी विमानन कंपनी यह रकम खर्च करने के लिए आगे नहीं आ रही है।’
विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइन भी अपने दो बड़े ए 340 विमानों को लीज पर देना चाहती है। कंपनी ने अब इस बारे में और विकल्पों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। कंपनी अब इन दोनों विमानों को बेचना चाहती है।