सन ग्रुप (sun group) ने आज कहा कि मध्यस्थता फैसले के तहत स्पाइसजेट द्वारा किए जाने वाले ब्याज भुगतान के संबंध में कोई आपसी समझौता करने का सवाल ही नहीं उठता है। बाद में स्पाइसजेट ने कहा कि वह इस मामले में आपसी समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध है।
रविवार को मीडिया खबरों में बताया गया था कि स्पाइसजेट सन ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन कलानिधि मारन और उनकी कंपनी काल एयरवेज के साथ कोई ठोस समझौता करने के लिए बातचीत कर रही है।
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला अपने अनुकूल नहीं रहने के बाद विमानन कंपनी द्वारा यह पहल की जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 के मध्यस्था आदेश में कहा था कि विमानन कंपनी अपने पूर्व प्रवर्तक मारन को लगभग 380 करोड़ रुपये की पूरी मध्यस्थता रकम का भुगतान करे।
सन ग्रुप ने बयान जारी कर कहा, ‘हमे पता चला है कि स्पाइसजेट के प्रवक्ता मीडिया में यह दावा कर रहे हैं कि विमानन कंपनी आपसी समाधान के लिए कलानिधि मारन और काल एयरवेज के साथ बातचीत कर रही है।’
हमें उम्मीद है कि स्पाइसजेट सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मानेगी: सन ग्रुप
इसमें कहा गया है, ‘हम इससे इनकार करते हैं। हमारा कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के 7 जुलाई, 2023 के आदेश के आधार पर हमारा मामला अंतिम चरण में है और ऐसी स्थिति में आपसी समझौते का कोई सवाल ही नहीं उठता है। हमें उम्मीद है कि स्पाइसजेट सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मानेगी और हमें 386 करोड़ रुपये की ब्याज राशि का तुरंत भुगतान कर देगी।’
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पाइसजेट को राशि भुगतान करने के लिए और अधिक समय देने की मांग खारिज कर दी थी और अपने पूर्व निर्देश के अनुसार 75 करोड़ रुपये का भुगतान करने में भी विफल रहने पर विमानन कंपनी को जमकर फटकाई लगाई थी।
स्पाइसजेट ने एक बयान में कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मारन और उनकी कंपनी काल एयरवेज से संबंधित मामले में भुगतान किए जाने वाले 380 करोड़ रुपये केवल निष्पादन कार्यवाही से शुरू हुई एक सुरक्षा जमा राशि है। किसी भी पक्ष द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित कार्यवाही के द्वारा निर्धारित होगी। इस याचिका पर आदेश 18 अप्रैल, 2023 के लिए सुरक्षित रखा गया है और इंतजार किया जा रहा है।’
साथ ही कंपनी ने कहा, ‘हम यह भी स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि स्पाइसजेट इस साल मई में 75 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए और अधिक समय की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के पास पहुंची थी, लेकिन मामले को 7 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। अदालती फैसलों का कंपनी काफी सम्मान करती है। व्यपाक हित में हम इस मामले में आपसी समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
इस साल 13 फरवरी को शीर्ष अदालत ने विमानन कंपनी को मारन के कुल 362.49 करोड़ रुपये के दावे के बदले तीन महीने के भीतर 75 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। विमानन कंपनी इसमें चूक गई। मारन ने मई में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और कहा कि स्पाइसजेट सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने में विफल रही है।