‘सिर्फ हम ही मुनाफा कमाने वाली रिटेल कंपनी हैं’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 8:43 PM IST

हाल ही में सुभिक्षा रिटेल के बारे में फैली नकारात्मक  बातों को कंपनी के प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यम खास तरजीह नहीं दे रहे हैं।


इस बारे में उनका कहना है कि यह सब अफवाहें वह कंपनियां फैला रही हैं जो उनकी कंपनी के साथ मुकाबले में पीछे हैं। उन्होंने कंपनी बेचने की संभावनाओं से भी इनकार किया। आर सुब्रमण्यम ने बात की एस कल्याण रामनाथन से। बातचीत के दौरान कंपनी से जुड़ी कुछ ऐसे ही बातों का खंडन किया। मुख्य अंश:

क्या आप सुभिक्षा की 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के बारे में सोच रहे है?

नहीं। हम कुछ भी ऐसा करने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। प्रेमजी ने जो हिस्सेदारी खरीदी है वह आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज से खरीदी है। हमें इससे कुछ भी नहीं मिला है।

क्या आप लोग पूंजी की कमी से भी जूझ रहे है?

मेरी जानकारी के हिसाब से सिर्फ हम ही ऐसी रिटेल कंपनी हैं जो मुनाफे में चल रही है। पिछले साल हमने 2,305 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। इस कारोबार में हमारा शुद्ध मुनाफा लगभग 41 करोड़ रुपये था। प्रेमजी जैसे कारोबारी अगर हमारी कंपनी में दिलचस्पी ले रहे हैं, तो इससे साफ जाहिर होता है कि हमारा कारोबारी मॉडल बिल्कुल सही है। यह हमें इस कारोबार में लंबे समय तक बनाए रखेगा।

भारतीय रिटेल कंपनियों के बीच मुकाबला काफी कड़ा हो गया है। सभी कंपनियां मुनाफे में रहना चाहती हैं। इसीलिए यह कंपनियां विदेशों में भी अच्छा कारोबार करेंगी। अगले 4-5 साल में आप विदेशों में भी भारतीय रिटेल कंपनियों के स्टोर देखेंगे।

खबर है कि दिल्ली क्षेत्र के आपूर्तिकर्ताओं ने आपकी कंपनी को माल की आपूर्ति करना बंद कर दिया है। इस बारे में आपका क्या कहना है?

पिछले दो साल से हमारा 70 फीसदी माल एजेंट्स से और बाकी 30 फीसदी किसानों से लिया जा रहा था। अब हमने इस मॉडल में बदलाव किया है अब हमारा ज्यादातर माल सीधे किसानों से आता है। इसका सीधा सा मतलब था कि हमें कुछ आपूर्तिकताओं के खाते बंद करने थे। इसीलिए उनके साथ हिसाब किताब करते समय कुछ मतभेद हुए थे। कुछ ने यह बात मीडिया में फैला दी। लेकिन इसका कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।

सुभिक्षा को सूचीबद्ध कराने के लिए आपने ब्लू ग्रीन इन्वेस्मेंट में निवेश किया था। जबकि कंपनी को सूचीबद्ध कराने के लिए आईपीओ भी ला सकते थे। फिर आपने इतनी लंबी प्रक्रिया क्यों चुनी?

हमने इस कंपनी में लगभग 3 करोड़ रुपये में बहुलांश हिस्सेदारी खरीदी थी। लेकिन आईपीओ लाना हमारे लिए काफी महंगा साबित होता। हमने सूचीबद्ध होने की लागत कम करने के लिए ही ऐसा किया है। हमारे जैसी कंपनी को सूचीबद्ध होने के लिए सेबी की तरफ से हरी झंडी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

आप कंज्यूमर डयूरेबल के कारोबार में आने की योजना बना रहे है?

कंज्यूमर डयूरेबल बाजार में मुनाफा मार्जिन काफी कम है। लेकिन इस क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए हम काफी सकारात्मक सोच रहे हैं। जून 2009 तक देश भर में हमारे 1,500 आउटलेट होंगे। हम भारतीय बाजार में मौजूद एलजी और सैमसंग जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से सामान खरीदेंगे। इसके साथ ही हम चीनी और कोरियाई उत्पादों पर भी नजर रखेंगे।

अगर हम यह मान कर चले कि अगले 3-4 साल में हमारे हर आउटलेट से लगभग 30 करोड़ रुपये की कमाई होगी तो हमारा यह कारोबार 4,500 करोड़ रुपये की कीमत का होगा। हमें उम्मीद है कि लोग हमारी रिटेल चेन सुभिक्षा की तरह ही पसंद करेंगे।

First Published : September 11, 2008 | 12:20 AM IST