वित्त वर्ष 2022-23 की आर्थिक समीक्षा 2023 के आम बजट से एक दिन पहले संसद के पटल पर रखी जाएगी। इसमें अगले वित्त वर्ष (2023-24) के लिए सकल घरेलू उत्पाद की अनुमानित वृद्धि दर 6 से 7 फीसदी के बीच रखी जा सकती है। भारत ने महामारी के दो साल का सामना ने कैसे किया और मौजूदा भू-राजनीतिक अड़चनें, मजबूती और कमजोरी तथा इनसे मिली सीख पर आर्थिक समीक्षा केंद्रित हो सकती है।
यह मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन और वित्त मंत्रालय के आर्थिक प्रकोष्ठ की उनकी टीम की पहली आर्थिक समीक्षा होगी। इसे तैयार करने का काम जोरशोर से चल रहा है। समीक्षा में 6-7 फीसदी अंतिम दायरा नहीं हो सकता है बल्कि अनुमान जो भी होगा वह इन दो अंकों के बीच का हो सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘दो साल महामारी का सामना करने के बाद यूरोप में युद्ध शुरू हो गया। समीक्षा की प्रमुख विषय-वस्तु यह होगी कि हमने इसका मुकाबला कैसे किया और अपनी कमजोरियों को हमने किस तरह दूर किया तथा इससे हमने क्या सीख ली। इसके साथ ही पर्याप्त बफर तैयार करने का भी जिक्र हो सकता है।’
अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी एजेंसियों और रिजर्व बैंक द्वारा जीडीपी वृद्धि अनुमान घटाए जाने के बाद वित्त मंत्रालय भी अब चालू वित्त वर्ष के लिए आंतरिक तौर पर जीडीपी वृद्धि 6.5 से 7 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद कर रहा है।
नागेश्वरन को वास्तविक और भारतीय अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक वृहद आर्थिक हालात का जमीनी स्तर के मूल्यांकन के लिए जाना जाता है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि समीक्षा में विभिन्न क्षेत्रों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के असर, परिवारों की आय पर मुद्रास्फीति का प्रभाव और कोयले की बढ़ी मांग तथा टिकाऊ ऊर्जा स्रोत विकसित करने पर अध्याय या खंड भी हो सकते हैं।
समीक्षा में इसका उल्लेख हो सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था किस तरह से नई उभरती दुनिया में अपनी जगह बना सकता है। उक्त अधिकारी ने कहा कि रूस कमजोर हो रहा है, पश्चिमी अर्थव्यवस्था मंदी का सामना कर रहा है और चीन में भी नरमी है।
आर्थिक समीक्षा में अगले साल के लिए वास्तविक जीडीपी का अनुमान लगाया जाता है जबकि आम बजट में नॉमिनल जीडीपी का अनुमान होता है। सरकार का अपना अनुमान होता है लेकिन आमतौर पर वह आरबीआई के वास्तविक जीडीपी अनुमान को अपनाती है।आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है। अन्य वैश्विक एजेंसियों ने भी भारत के जीडीपी वृद्धि का अनुमान कम कर दिया है।