उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने आज स्टार्टअप ऋण गारंटी योजना (सीजीएसएस) अधिसूचित की है। इसका मकसद वाणिज्यिक बैंकों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश फंडों (एटीएफ) से स्टार्टअप को बगैर कुछ गिरवी रखे 10 करोड़ रुपये तक कर्ज मुहैया कराना है।
इसके पहले स्टार्टअप इंडिया ऐक्शन प्लान के तहत इस योजना को पेश किया गया था, जिसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का कोष प्रस्तावित था। बहरहाल हाल की अधिसूचना में कोष की राशि के बारे में उल्लेख नहीं किया गया है।
इस योजना के तहत एक व्यक्ति के कर्ज लेने और सामूहिक रूप से कर्ज लेने वाले पात्र अभ्यर्थियों- दोनों तरह उधारी पर ऋण गारंटी मिलेगी। लेन-देन पर आधारित कवर कुल पात्रता का 80 प्रतिशत अधिकतम 3 करोड़ रुपये मिल सकेंगे। वहीं 3-5 करोड़ रुपये कर्ज की मांग की स्थिति में पात्रता का 75 प्रतिशत और 5 से 10 करोड़ कर्ज की सुविधा के मामले में पात्रता का 65 प्रतिशत कर्ज मिलेगा।
डीपीआईआईटी ने एक बयान में कहा है, ‘समूह में कर्ज लेने (अंब्रेला बेस्ड गारंटी कवर) के मामले में वेंचर डेट फंडों (वीडीएफ) को गारंटी मुहैया कराई जाएगी, जो सेबी के एआईएफ नियमन के तहत पंजीकृत हैं। भारतीय स्टार्टअप के फंडिंग में यह बढ़ता सेग्मेंट है। यह उनके द्वारा लिए जाने वाले धन की प्रकृति और उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई डेट फंडिंग के आधार पर होगा। अंब्रेला बेस्ड कवर का मूल वास्तविक हानि या समूह में निवेश के 5 प्रतिशत तक होगा और यह प्रति उधारी लेने वाले को अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक दिया जाएगा।’
इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए संस्थागत व्यवस्था के साथ डीपीआईआईटी एक प्रबंधन समिति (एमसी) औऱ जोखिम मूल्यांकन समिति (आरईसी) बनाएगा। इसके माध्यम से योजना की समीक्षा, निरीक्षण पर परिचालन पर नजर रखने का काम किया जाएगा। नैशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) इस योजना का कामकाज देखेगी, जो अन्य क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंडों का संचालन करती है।
डीपीआईआईटी ने कहा, ‘संबंधित मंत्रालयों, बैंकों, एनबीएफसी, वेंचर डेट फंडों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप के जानकारों के साथ गहन विचार विमर्श के बाद सीजीएसएस का खाका तैयार किया गया है। यह योजना कर्ज देने वाली संस्थाओं को सक्षम बनाने व उनके जोखिम कम करने का काम करेगी और वे स्टार्टअप को गिरवी मुक्त कर्ज दे सकेंगे।’
देश में स्टार्टअप के अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी, 2016 को स्टार्टअप इंडिया ऐक्शन प्लान पेश किया था। डीपीआईआईटी ने कहा, ‘डीपीआईआईटी में पंजीकृत स्टार्टअप के लिए समर्पित ऋण गारंटी से गिरवी मुक्त कर्ज की अनुपलब्धता के मसले का समाधान होगा और इससे नवोन्मेषी स्टार्टअप को वित्तीय सहायता मिल सकेगी और पूर्ण कारोबारी इकाई के रूप में उनकी यात्रा आगे बढ़ सकेगी।
यह योजना सरकार द्वारा नवोन्मेष को प्रोत्साहित करे और उद्यमशीलता बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे भारत के स्टार्टअप के लिए विश्व में सबसे बेहतर वातावरण मिल सके।’ उम्मीद की जा रही है कि सीजीएसएस स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत चल रही पहल जैसे स्टार्टअप के लिए फंडों के फंड और स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम के पूरक का काम करेगी और भारतीय स्टार्टअप के लिए घरेलू पूंजी जुटाने में मदद करेगी।
सरकार ने 2016 में स्टार्टअप के लिए फंडों का फंड (एफएफएस) स्थापित किया था। यह 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी के साथ शुरू किया गया था, जिससे पूंजी की उपलब्धता बढ़ सके और साथ ही निजी निवेशकों को इस दिशा में प्रेरित किया जा सके। इसका मकसद भारत के स्टार्टअप की वृद्धि के लिए वातावरण तैयार करना था। एफएफएस से स्टार्टअप में सीधे निवेश नहीं होता, बल्कि इसमें सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश फंडों को पूंजी मुहैया कराई जाती है।