अर्थव्यवस्था

कच्चा तेल इस साल पहली बार 90 डॉलर पर, भारत में पेट्रोल, डीजल कीमतों में बदलाव की उम्मीद घटी

रूस के साथ सऊदी अरब की अगुवाई वाले ओपेक प्लस द्वारा दिसंबर के अंत तक वैश्विक बाजार में आपूर्ति में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती जारी रखने का निर्णय लिया गया।

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भाषा   
Last Updated- September 06, 2023 | 9:08 PM IST

सऊदी अरब और रूस द्वारा अपने कच्चा तेल उत्पादन और निर्यात में स्वैच्छिक कटौती को वर्ष के अंत तक बढ़ाए जाने से कच्चे तेल की कीमतें 10 महीने के उच्चतम स्तर लगभग 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की 85 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरा करता है। ऐसे में इसके दाम चढ़ने का मतलब है कि भारत को इसके लिए अधिक खर्च करना होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल की बाजार आधारित कीमत की ओर लौटने की संभावना और कम हो गई है।

पिछले सप्ताह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 6.5 प्रतिशत बढ़ी

रूस के साथ सऊदी अरब की अगुवाई वाले ओपेक प्लस द्वारा दिसंबर के अंत तक वैश्विक बाजार में आपूर्ति में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती जारी रखने का निर्णय लेने के बाद पिछले सप्ताह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके साथ ही, रूस ने हाल के महीनों में अपने निर्यात में स्वैच्छिक कटौती की है। इस कदम से मंगलवार को ब्रेंट इस साल पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। बुधवार को यह 89.67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

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कच्चे तेल का औसत मूल्य इस महीने 89.81 डॉलर प्रति बैरल रहा

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत द्वारा आयातित कच्चे तेल का औसत मूल्य इस महीने 89.81 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि अगस्त में यह 86.43 डॉलर था। मई और जून में भारत के लिए तेल का मूल्य 73-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में मंडरा रहा था, जिससे बाजार आधारित मूल्य निर्धारण की वापसी और पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद फिर से जगी थी। लेकिन जुलाई में कीमतें बढ़कर 80.37 डॉलर प्रति बैरल हो गईं और अब 90 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं।

First Published : September 6, 2023 | 9:08 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)