वित्त मंत्रालय ने 92 केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) को ट्रेड रिसीवेबल डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) में शामिल होने का आदेश दिया है, जिन्होंने सरकार द्वारा इसे अनिवार्य बनाए जाने के बावजूद ऐसा नहीं किया है।टीआरईडीएस एक संस्थागत व्यवस्था है। इसकी स्थापना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए सार्वजनिक उपक्रम और कॉरपोरेट खरीदारों से कई फाइनेंसरों के माध्यम से चालान में छूट के लिए की गई है।
टीआरईडीएस पर चालान में छूट में तीन पक्ष शामिल हैं- एमएसएमई आपूर्तिकर्ता, कॉरपोरेट/सार्वजनिक उपक्रम के खरीदार और फाइनेंसर। छूट के तरीकों के आधार पर खरीदार या आपूर्तिकर्ता चालान अपलोड करता है और दूसरा पक्ष इसे अनुमोदित करता है। एक बार चालान स्वीकृत हो जाने के बाद, प्लेटफॉर्म पर फाइनेंसर चालान पर बोली लगाना शुरू करते हैं। आपूर्तिकर्ता बोली को स्वीकार करता है और छूट की राशि उसके खाते में भेज दी जाती है।
सार्वजनिक उद्यम विभाग ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘255 में से परिचालन वाले 92 केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम जो टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म में शामिल नहीं हुए है उन्हें ऐसा करने के लिए निर्देश दिया गया है।’ इस महीने की शुरुआत में डीपीआई द्वारा जारी एमओयू (समझौता ज्ञापन) के संशोधित मापदंडों के मुताबिक सार्वजनिक उपक्रमों के मध्यम और लघु उद्यम विक्रेताओं को समय पर भुगतान में टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग के लिए पांच अंक आवंटित किए हैं। समझौता ज्ञापन मानकों का उपयोग सार्वजनिक उपक्रम के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है, जो बदले में उनके कर्मियों और प्रबंधन के भत्ते को प्रभावित कर सकता है।
2017 में सरकार ने सभी सार्वजनिक उपक्रमों को टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण अनिवार्य किया था। सार्वजनिक और निजी दिग्गज कंपनियों द्वारा भुगतान में देरी की जाती है तो छोटे उद्यमों को कामकाज के लिए धन की समस्या हो जाती है। वर्तमान में अभी तीन टीआरईडीएस आधारित पोर्टल हैं- आरएक्सआईएल (रिसीवेबल्स एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड), एम1 एक्सचेंज और इनवॉयसमार्ट। पिछले महीने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि केंद्र एमएसएमई के बकाया राशि चुकाने के पर्याप्त उपाय करेंगे और केद्रीय सरकार के विभाग और सार्वजनिक उपक्रम यह सुनिश्चित करेंगे कि 90 दिनों में एमएसएमई का भुगतान कर दिया जाए।