सरकार विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र (space sector) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मानदंडों को और उदार बनाने पर विचार कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह बात कही।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) में सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सऊदी अरब की कंपनियों के लिए भारत में विमानन, दवा, ‘बल्क ड्रग्स’, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण तथा कृषि-तकनीक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने की काफी संभावनाएं हैं।
यहां भारत-सऊदी अरब निवेश फोरम की बैठक में उन्होंने कहा, “सहयोग की जबरदस्त गुंजाइश है… जैसे कि कृत्रिम मेधा (एआई), रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, स्वचालन तथा अंतरिक्ष में जहां हम अपने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र तथा विदेशी निवेश लाने के लिए अपने एफडीआई मानदंडों को और उदार बनाने पर विचार कर रहे हैं।” फिलहाल अंतरिक्ष क्षेत्र में सिर्फ सरकार के जरिए ही उपग्रहों की स्थापना और संचालन के क्षेत्र में 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति है।
यह भी पढ़ें : भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा करेगा चीन के BRI का मुकाबला
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की कई कंपनियों ने भारतीय पवन और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश किया है। सिंह ने कहा, “हम आपके साथ सहयोगात्मक रूप से काम करने के लिए तत्पर हैं।” उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के सैन्य उद्योग और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के बीच सहयोग की भी काफी गुंजाइश है। इससे आपसी हित की रक्षा परियोजनाओं पर साझा सहयोग के जरिए काम कर किया जा सकता है।
कारोबार के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि 2022-23 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 52.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष में भारत का निर्यात 10.7 अरब डॉलर रहा, जबकि 2021-22 में यह 8.8 अरब अमेरिकी डॉलर था। 2021-22 में द्विपक्षीय व्यापार 43 अरब डॉलर था। सिंह ने कहा, “हमने आज आज 47 समझौता ज्ञापन (एमओयू) और समझौते बी2बी (कारोबार से कारोबार) तथा बी2जी (कारोबार से सरकार)… पर हस्ताक्षर किए हैं।”