अर्थव्यवस्था

फिस्कल हेल्थ पर जोर देने से कैपिटल एक्सपेंडिचर की रफ्तार नहीं रह पाएगी बरकरार: गोल्डमैन

इस समय कॉरपोरेट क्षेत्र पर कर्ज का दबाव कम है और बैंकों के पास भी ऐसी स्थिति में मदद करने के लिए पर्याप्त पूंजी है।

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भाषा   
Last Updated- October 09, 2023 | 10:45 PM IST

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सॉक्स ने सोमवार को कहा कि राजकोषीय सुदृढ़ीकरण पर जोर देने से पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में देखी गई तेजी आगे चलकर टिकाऊ नहीं रह जाएगी।

कॉरपोरेट क्षेत्र पर कर्ज का दबाव कम

गोल्डमैन सॉक्स ने अपनी एक टिप्पणी में कहा कि इस स्थिति से बचने के लिए निजी क्षेत्र को अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। इस समय कॉरपोरेट क्षेत्र पर कर्ज का दबाव कम है और बैंकों के पास भी ऐसी स्थिति में मदद करने के लिए पर्याप्त पूंजी है।

ब्रोकरेज हाउस के विश्लेषकों ने कहा, ”मध्यम अवधि में राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के लक्ष्य को देखें तो केंद्र सरकार अगले दो वर्षों में अपने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 1.5 प्रतिशत तक कम करने का इरादा रखती है। ऐसी स्थिति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में हुई वृद्धि को आगे कायम नहीं रखा जा सकता है।”

कॉरपोरेट और घरेलू क्षेत्र लगभग तीन-चौथाई निवेश के लिए जिम्मेदार

इस टिप्पणी के अनुसार 1997-2022 के बीच कॉरपोरेट और घरेलू क्षेत्र लगभग तीन-चौथाई निवेश के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन पिछले दशक में दोनों पक्षों के निवेश में गिरावट आई है। गोल्डमैन सॉक्स ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र का पूंजीगत व्यय बढ़ने से भारत में वास्तविक निवेश में वृद्धि का रुझान देखा गया है। पिछले तीन वर्षों में ही केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 33 प्रतिशत बढ़ चुका है।

First Published : October 9, 2023 | 6:33 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)