वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी भारत के लिए सकारात्मक है और चालू वित्त वर्ष में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.2 से 7.4 फीसदी के दायरे में रह सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने आज ये बातें कही।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष के लिए 7.2 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 7.4 फीसदी विकास दर की उम्मीद जाहिर की है।
नागेश्वरन ने कहा, ‘मेरा मानना है कि वैश्विक वृद्धि पर असर पड़ना तय है, चाहे विकसित देशों के केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीतियों को सख्त बनाए या नहीं क्योंकि उच्च मुद्रास्फीति के कारण उपभोक्ताओं की मांग और क्रय शक्ति कम होगी।’ उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक हद तक नरमी भारत के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है कि
वैश्विक स्तर पर मांग घटने से कच्चे तेल और अन्य जिंसों की कीमतों में कमी आएगी। साथ ही औद्योगिक धातुओं और खाद्य आपूर्ति पर भी दबाव कम होगा।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी 13.5 फीसदी की दर से बढ़ी थी, जो सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान से कम थी। पहली तिमाही में जीडीपी के आंकड़े आने के बाद कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने विकास दर अनुमान को घटा दिया है। जीडीपी वृद्धि दर अनुमान को घटाने वालों में भारतीय स्टेट
बैंक, गोल्डमैन सैक्स, सिटीग्रुप तथा रेटिंग एजेंसियां मूडीज, फिच और इंडिया रेटिंग्स शामिल हैं।
नागेश्वरन ने इसके पीछे कोविड महामारी के विलंबित दुष्प्रभावों और यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पैदा हुए हालात को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि इन कारकों से आर्थिक वृद्धि की दर प्रभावित हो रही है। जनवरी के आखिर में पेश आर्थिक समीक्षा में वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 8-8.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था।
ऊंची मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए अधिकतर केंद्रीय बैंकों ने इस साल ब्याज दरों में इजाफा किया है। रीपो दर पर बिज़नेस स्टैंडर्ड की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि 30 सितंबर को होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में आरबीआई रीपो दर में और 35 से 50 आधार अंक का इजाफा कर सकता है।
नागेश्वरन ने कहा, ‘मेरा मानना है कि चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में रूस-यूक्रेन युद्ध का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है लेकिन अब चीजें पटरी पर आ रही हैं और दूसरी छमाही में हम अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। ऐसे में मुझे लगता है कि हम आरबीआई और आईएमएफ द्वारा जीडीपी वृद्धि के अनुमान को हासिल करने में सफल रहेंगे।’
निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय पर नागेश्वर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि निजी क्षेत्र में निवेश हो रहा है। अगर आप कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों की धारणाओं को देखें तो निश्चित रूप से वास्तविक निवेश की दिशा में हम आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। पूंजी बाजार में आईपीओ आने शुरू हो गए हैं और मुझे लगता है कि यह उत्साहजनक संकेत हैं।’