अर्थव्यवस्था

सरकार ने लॉन्च की 5000 करोड़ की स्कीम, फार्मा-मेडटेक सेक्टर में इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा

भारतीय फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री ने मुख्य रूप से जेनेरिक दवाओं के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया है और इस सेक्टर में ग्लोबल लीडरशिप हासिल की है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- September 26, 2023 | 6:57 PM IST

केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने भारत में फार्मास्युटिकल और मेडिकल टेक्नोलॉजी (MedTech) सेक्टर में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की PRIP स्कीम शुरू की है। लक्ष्य सेक्टर का ध्यान कॉस्ट-बेस्ड से इनोवेशन-बेस्ड ग्रोथ पर शिफ्ट करना है। यह स्कीम फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में भारत के रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाएगी।

भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री वर्तमान में उत्पादन मात्रा के मामले में विश्व स्तर पर तीसरे नंबर पर है, जिसका बाजार साइज लगभग 50 बिलियन डॉलर है।

मंडाविया ने इसे फार्मास्युटिकल सेक्टर में आत्मनिर्भरता के लिए एक स्पष्ट संदेश बताते हुए फार्मास्युटिकल और मेडटेक इंडस्ट्री में ग्लोबल लीडर बनने के लिए भारत में एक मजबूत रिसर्च ईकोसिस्टम स्थापित करने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि हमारे पास भारत में रिसर्च नहीं होती है, लेकिन मल्टीनेशनल कंपनियां अपने मुनाफे का 20-22 प्रतिशत रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में निवेश करती हैं, जबकि एक भारतीय कंपनी का निवेश औसत लगभग 10 प्रतिशत है।”

भारतीय फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री ने मुख्य रूप से जेनेरिक दवाओं के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया है और इस सेक्टर में ग्लोबल लीडरशिप हासिल की है। 16 अगस्त के एक नोटिफिकेशन में यह कहा गया, “वित्तीय वर्ष 2021 में, टॉप 10 भारतीय दवा कंपनियों ने अपनी बिक्री का लगभग 7.2% रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में निवेश किया था। ज्यादा रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहित करके देश में रिसर्च एवं डेवलपमेंट खर्च को बढ़ावा देने की जरूरत है।”

भारतीय फार्मास्युटिकल एलायंस (IPA) के महासचिव सुदर्शन जैन ने फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के इनोवेशन और वैल्यू चेन को आगे बढ़ाने में इस मील के पत्थर के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फंडिंग, नियमों को सरल बनाने और इंडस्ट्री और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने से देश में समग्र रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) ईकोसिस्टम में वृद्धि होगी।

यह स्कीम एक महत्वपूर्ण समय में आई है क्योंकि दुनिया भर में मेडिकल डिवाइस का बाजार 2021 में 455.34 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2021 और 2028 के बीच 5.4% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ 657.98 बिलियन डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, भारत वर्तमान में ग्लोबल मेडिकल का केवल 1.5% है। वहीं, ग्लोबल मेडटेक रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) वर्कफोर्स में भारत की 8% हिस्सेदारी है।

फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि वित्त वर्ष 24 में भारतीय फार्मा निर्यात बढ़कर 24 बिलियन डॉलर हो सकता है, जो कि वित्त वर्ष 23 में 23 बिलियन डॉलर से ज्यादा है।

मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पवन चौधरी ने कहा कि PRIP स्कीम निस्संदेह भारत में इनोवेटिव मेडटेक प्रोडक्ट की ग्रोथ को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर सरकार के जोर और इस संबंध में भारत की मौजूदा ताकत का लाभ उठाने के इरादे की भी सराहना की।

PRIP स्कीम में दो मुख्य भाग होते हैं। पहला भाग इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर केंद्रित है, और इसमें राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) के सात कैंपस में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनाना शामिल है। इस पहल की अनुमानित लागत लगभग 700 करोड़ रुपये है, जो पांच सालों में पूरा होना है।

स्कीम के दूसरे भाग में बड़ी इंडस्ट्री, MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और रिसर्च गतिविधियों के लिए स्टार्टअप को वित्तीय सहायता प्रदान करना शामिल है। यह समर्थन शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोगात्मक रिसर्च के लिए या विशिष्ट प्राथमिकता वाले सेक्टरों में इन-हाउस रिसर्च आयोजित करने के लिए हो सकता है। इस वित्तीय सहायता घटक के लिए कुल 4,250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मंत्री ने अपने समापन कॉमेंट में कहा कि पहले, सख्त नियम स्टार्टअप और MSME जैसे छोटे प्लेयर्स को मेडिकल रिसर्च में शामिल होने से रोकते थे। हालांकि, इस योजना के कार्यान्वयन के साथ, सरकार ने अब स्टार्टअप और MSME के लिए मेडिकल रिसर्च और डिवाइस टेक्नॉलजी विकास में भाग लेना संभव बना दिया है।

First Published : September 26, 2023 | 6:16 PM IST