वित्त वर्ष 2023 की जून तिमाही में भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात करीब 10 लाख टन घटा दिया है, वहीं प्रतिबंध प्रभावित रूस से मिल रहे सस्ते कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है।
वित्त वर्ष 22 में भारत के कच्चे तेल के आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 9.2 प्रतिशत थी, जबकि वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में हिस्सेदारी घटकर 4.5 प्रतिशत रह गई है। इस अवधि के दौरान रूस से कच्चे तेल के आयात की हिस्सेदारी 2.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.9 प्रतिशत हो गई है। जब डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति थे, भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात शुरू किया था, जिससे व्यापार अधिशेष को लेकर अमेरिका की शिकायत दूर की जा सके। ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट पर जोर दिया और वह भारत के साथ हो रहे व्यापार घाटे को लेकर काफी मुखर थे। वह अक्सर भारत को ज्यादा शुल्क लगाने वाला देश कहते थे। बाइडन प्रशासन में भी भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात जारी रखा था।
वित्त वर्ष 17 तक भारत अमेरिका से कच्चे तेल का आयात नहीं करता था। जबकि वित्त वर्ष 18 में भारत के कच्चे तेल के कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 0.7 प्रतिशत हो गई। इसने तेजी से गति पकड़ी और वित्त वर्ष 20 में हिस्सेदारी बढ़कर 4.8 प्रतिशत और वित्त वर्ष 21 में 9 प्रतिशत हो गई।
बहरहाल वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि जून तिमाही में कच्चे तेल का अमेरिका से आयात गिरकर 34 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले समान अवधि में 44 लाख टन था।
रूस से कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ने की एक अहम वजह यह है कि प्रतिबंध झेल रहा रूस इस समय छूट पर तेल दे रहा है। जून तिमाही में इराक और सऊदी अरब के बाद रूस कच्चे तेल का भारत का तीसरा बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया और संयुक्त अरब अमीरात से ऊपर आ गया है, जो भारत का अहम आपूर्तिकर्ता रहा है।
जून तिमाही के दौरान रूस से कच्चे तेल का आयात देश के कुल 4.2 अरब डॉलर निर्यात का 71 प्रतिशत (3.02 अरब डॉलर) रहा है।
पिछले सप्ताह विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से सस्ते तेल के आयात के भारत के फैसले का एक बार फिर बचाव करते हुए कहा कि तमाम आपूर्तिकर्ताओं ने अपनी आपूर्ति यूरोप को बढ़ा दी है, जो रूस के कम तेल खरीद रहे हैं। जयशंकर ने नवीं भारत थाईलैंड संयुक्त आयोग की बैठक में कहा, ‘आज ऐसी स्थिति है कि हर देश अपने नागरिकों के लिए बेहतर संभावित सौदे कर रहा है, जिससे ऊर्जा की उच्च कीमतों से बचा जा सके। और यही हम भी कर रहे हैं। हमारे देश की प्रति व्यक्ति आय 2000 डॉलर है। ये ऐसे लोग नहीं हैं, जो ज्यादा कीमत का बोझ उठा सकते हैं।’
भारत और रूस के संबंधों पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए अमेरिका के प्रवक्ता नेड प्राइस ने मंगलवार को कहा कि भारत का रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध है और रूस से विदेश नीति को लेकर लंबी प्रतिबद्धता है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, ‘किसी दूसरे देश की विदेश नीति के बारे में बोलना मेरा काम नहीं है। लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि हमने भारत से क्या सुना है। हमने देखा है कि रूस द्वारा यूक्रेन में हस्तक्षेप के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में देशों ने साफ साफ बोला है और रूस की आक्रामकता के खिलाफ मतदान किया है।’