अर्थव्यवस्था

FY24 में भारत को टॉप-10 व्यापारिक साझेदारों में से 9 के साथ सहना पड़ा व्यापार घाटा

चीन के साथ दोतरफा व्यापार 2023-24 में 118.4 अरब डॉलर रहा, और वह अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया।

Published by
भाषा   
Last Updated- May 26, 2024 | 3:12 PM IST

India’s trade deficit in FY24: भारत को वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान चीन, रूस, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया समेत शीर्ष 10 व्यापारिक साझेदारों में नौ के साथ व्यापार घाटे का सामना करना पड़ा है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। व्यापार घाटा, आयात और निर्यात के बीच का अंतर है।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि बीते वित्त वर्ष में 2022-23 की तुलना में चीन, रूस, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के साथ घाटा बढ़ गया। दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, रूस, इंडोनेशिया और इराक के साथ व्यापार घाटे में कमी हुई।

अमेरिका को पीछे छोड़ चीन बना भारत का सबसे बड़ा साझेदार

वित्त वर्ष 2023-24 में चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 85 अरब डॉलर, रूस के साथ 57.2 अरब डॉलर, दक्षिण कोरिया के साथ 14.71 अरब डॉलर और हांगकांग के साथ 12.2 अरब डॉलर हो गया। चीन के साथ दोतरफा व्यापार 2023-24 में 118.4 अरब डॉलर रहा, और वह अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया।

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में 118.28 अरब डॉलर रहा। भारत का अपने चार प्रमुख व्यापारिक साझेदारों – सिंगापुर, यूएई, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया (एशियाई गुट के हिस्से के रूप में) के साथ मुक्त व्यापार समझौता है।

अमेरिका समेत 6 देशों के पास भारत का ट्रेड सरप्लस

भारत का 2023-24 में अमेरिका के साथ 36.74 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (trade surplus) था। अमेरिका उन कुछ देशों में से एक है जिनके साथ भारत का व्यापार अधिशेष है। यह अधिशेष ब्रिटेन, बेल्जियम, इटली, फ्रांस और बांग्लादेश के पास भी है।

पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल व्यापार घाटा कम होकर 238.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया था, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष यानी वित्त वर्ष 23 में यह 264.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई देश मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कच्चे माल या मध्यस्थ उत्पादों (raw materials or intermediary products) का आयात कर रहा है, तो घाटा हमेशा बुरा नहीं होता है। हालांकि, इससे घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ता है।

First Published : May 26, 2024 | 3:08 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)