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RBI Minutes: खाद्य महंगाई ने बढ़ाई आरबीआई की चिंता, MPC ने कड़ी नजर बनाये रखने पर दिया जोर

RBI को खुदरा मुद्रास्फीति दो से छह प्रतिशत के दायरे में रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। केंद्रीय बैंक का इसे चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य है

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भाषा   
Last Updated- August 24, 2023 | 7:34 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी से महंगाई पर पर पड़ने वाले असर की आशंका के चलते नीतिगत दर रेपो को यथावत रखने का विकल्प चुना। रिजर्व बैंक ने 10 अगस्त को अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा था।

एम डी पात्रा, शशांक भिडे, आशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा और राजीव रंजन सहित सभी छह सदस्यों ने नीति दर पर यथास्थिति रखने के पक्ष में मतदान किया था।

गुरुवार को जारी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के ब्योरे के अनुसार दास ने कहा, ‘हमारा काम (मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने का) अब भी पूरा नहीं हुआ है। सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर…मौद्रिक नीति खुदरा मुद्रास्फीति पर इसके प्रारंभिक प्रभाव के असर को देख सकती है।’

RBI को खुदरा मुद्रास्फीति दो से छह प्रतिशत के दायरे में रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। केंद्रीय बैंक का इसे चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य है।

गवर्नर ने कहा, ‘ साथ ही खाद्य कीमतों के आगे भी व्यापक मुद्रास्फीति पर दबाव बनाने और मुद्रास्फीति बढ़ने को लेकर जो आशंका है, उसे नियंत्रित करने के लिए जोखिम को पहले से ही भांपने तथा उससे निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।’

RBI के डिप्टी गवर्नर पात्रा ने कहा कि मुद्रास्फीति को निर्धारित लक्ष्य तक नीचे लाने के एमपीसी के उद्देश्य के लिए मुख्य मुद्रास्फीति (कोर इनफ्लेशन) में निरंतर कमी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

First Published : August 24, 2023 | 7:26 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)