अर्थव्यवस्था

मार्च में मैन्युफैक्चरिंग PMI 3 माह के उच्च स्तर पर, लागत का दबाव कम होने से बढ़ी खरीद

Published by
शिवा राजोरा
Last Updated- April 03, 2023 | 7:32 PM IST

मार्च में भारत का विनिर्माण क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 3 महीने के उच्च स्तर 56.4 पर पहुंच गया है, जो फरवरी में 55.3 था। सोमवार को एक प्राइवेट सर्वे में कहा गया है कि आयात लागत में कमी और उत्पादन में बढ़ोतरी की वजह से ऐसा हुआ है।

एसऐंडपी ग्लोबल के एक सर्वे में कहा गया है, ‘मार्च के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय विनिर्माताओं (मैन्युफैक्चरर्स) के नए बिजनेस में और तेजी आई है। विस्तार की रफ्तार तेज थी और यह 3 महीने में सबसे अधिक रही। फर्मों ने कहा कि मार्केटिंग की कवायदों का असर पड़ा है। मांग बढ़ने और प्रतिस्पर्धी मूल्य के कारण वृद्धि दर्ज हुई है।’

वैश्विक रेटिंग एजेंसी के सर्वे में अगर 50 से ऊपर अंक आता है तो यह विनिर्माण के प्रसार और 50 से कम अंक संकुचन का संकेतक होता है। मार्च के आंकड़ों से पता चलता है कि विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में लगातार 21वें महीने बढ़ोतरी हुई है।

सर्वे में कहा गया है कि लागत का दबाव कम होने से खरीद बढ़ी है। मार्च के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले ढाई साल में इनपुट लागत में दूसरी सबसे कम बढ़ोतरी हुई है।

इसमें कहा गया है, ‘दरअसल 96 प्रतिशत फर्मों ने संकेत दिए कि फरवरी से लागत के बोझ में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बिक्री का मूल्य वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में बढ़ा है, महंगाई की दर में सुधार हुआ और यह कुल मिलाकर फरवरी के बराबर ही थी।’

एसऐंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डी लीमा ने कहा कि मार्च में उत्पादन में विस्तार तेजी से जारी रहा और फर्मों ने स्टॉक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

उन्होंने कहा, ‘कंपनियों ने कहा कि उनके और आपूर्तिकर्ताओं के पास पर्याप्त क्षमता है। आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में सुधार हुआ है। कच्चे माल की उपलब्धता भी सुधरी है। इसकी वजह से डिलिवरी का वक्त कम हो गया है और लागत का दबाव घटा है। कुल मिलाकर सितंबर 2020 के बाद से इनपुट लागत में दूसरी सबसे सुस्त वृद्धि रही है।’

भारत के विनिर्माताओं को उम्मीद है कि ग्राहकों के साथ रिश्तों में सुधार, नए उत्पादों और विज्ञापन से बिक्री को समर्थन मिला है। वहीं प्रतिस्पर्धात्मकता और सामान्य महंगाई की चिंता की वजह से कुल मिलकार सकारात्मक धारणा 8 माह के निचले स्तर पर पहुंच गई है।

बहरहाल वस्तुओं के उत्पादकों ने पेरोल के आंकड़े में मार्च में व्यापक रूप से कोई बदलाव नहीं किया है क्योंकि वस्तुओं के उत्पादकों की क्षमता पर मामूली दबाव है और कारोबार की मात्रा मामूली दर से बढ़ी है, जो एक साल में सबसे कमजोर था।

डी लीमा ने कहा कि लंबित काम का बोझ मार्च में मामूली बढ़ा है, जिससे नौकरियों के सृजन में व्यवधान आया है।

First Published : April 3, 2023 | 7:32 PM IST