ऐप आधारित हाजिरी व्यवस्था लागू होने के बाद इस साल जनवरी और फरवरी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना (मनरेगा) के तहत सृजित ‘जन कार्य दिवसों’ की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कम हुई है। मनरेगा श्रमिकों के समूह दिल्ली में जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से उपस्थिति और भुगतान की नई प्रणाली के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
नरेगा संघर्ष मोर्चा द्वारा संकलित डेटा से पता चलता है कि इस साल जनवरी और फरवरी में 34.59 करोड़ ‘जन कार्य दिवस’ सृजित किए गए। यह जनवरी और फरवरी 2022 की तुलना में काफी कम है, जब 53.07 करोड़ व्यक्ति कार्य दिवस सृजित किए गए थे। वर्ष 2021 में, इसी अवधि में 56.94 करोड़ जन कार्य दिवस सृजित किए गए थे, जबकि 2020 में संबंधित दो महीनों में यह संख्या 47.75 करोड़ और 2019 में 47.86 करोड़ थी।
MIS रिपोर्ट का उपयोग करके संबंधित डेटा की गणना की गई है। राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (NMMS) का विरोध कर रहे मनरेगा श्रमिकों ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है। उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की है।
मनरेगा श्रमिक आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) का भी विरोध कर रहे हैं, जिसे अनिवार्य कर दिया गया है। उनका कहना है कि अनेक श्रमिकों के पास ABPS खाते नहीं हैं, इसलिए इसे वापस लिया जाना चाहिए।
नरेगा संघर्ष मोर्चा द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, एक फरवरी को कुल मनरेगा श्रमिकों में से 40 फीसदी से कम ABPS भुगतान के लिए पात्र थे। NMMS ऐप का उपयोग दिन में दो बार जियोटैग तस्वीरों को अपलोड कर मनरेगा कार्यस्थलों पर श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए किया जाता है।
एक जनवरी, 2023 को सभी कार्यस्थलों पर इसे अनिवार्य कर दिया गया था। तीस जनवरी, 2023 को, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने घोषणा की थी कि एक फरवरी से सभी मनरेगा मजदूरी भुगतान केवल आधार-आधारित भुगतान प्रणाली के माध्यम से किए जाने चाहिए।
मनरेगा के तहत लगभग 27.5 करोड़ पंजीकृत श्रमिक हैं। 2022-23 में 8.4 करोड़ श्रमिकों ने काम किया और 272.8 करोड़ जन कार्य दिवस सृजित किए गए।