आवाजाही के विभिन्न तरीकों को एक दूसरे से जोड़ने के साथ इनका डिजिटलीकरण और केंद्र व राज्य के बीच तालमेल प्रधानमंत्री द्वारा शनिवार को पेश की गई राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (एनएलपी) का मूल आधार है। नैशनल रेल प्लान और मैरीटाइम इंडिया विजन जैसी पहले की योजना के साथ एनएलपी मौजूदा महंगे, प्रदूषण करने वाले और भीड़भाड़ बढ़ाने वाली व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
उम्मीद की जा रही है कि इससे सड़कों पर बहुत ज्यादा निर्भरता की जगह (भारत में इसकी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक स्तर पर 25 प्रतिशत है) रेलवे (इस समय 30 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक स्तर पर 60 प्रतिशत है) पर निर्भरता बढ़ेगी। सागरमाला, भारतमाला और समर्पित माल ढुलाई गलियारे जैसे कई लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले ही इस दिशा में चल रही हैं।
इस परियोजना की शुरुआत के वक्त प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए लॉजिस्टिक्स लागत कम करना अहम है और मौजूदा नीतियां नए बुनियादी ढांचे के हिसाब से अहम हैं। मोदी ने कहा, ‘अगर कोई एक नीति है, जो एनएलपी को मदद पहुंचाएगी, जो वह पीएम-गतिशक्ति एनएमपी है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं खुश हूं कि आज सभी राज्यों व केंद्रीय मंत्रालयों ने प्लेटफॉर्म का एकीकरण किया है और करीब सभी विभागों ने साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। केंद्र व राज्यों के विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के आंकड़े तैयार किए गए हैं।’
विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक में भारत इस समय 47वें स्थान पर है। भारत के यातायात के सभी साधनों सड़कों, रेलमार्गों और जलमार्ग (बंदरगाह सहित) में मांग और आपूर्ति में अंतर है और भीड़ की स्थिति है। योजना है कि लॉजिस्टिक्स की लागत घटाकर जीडीपी के प्रतिशत में एक अंक पर लाया जाए, जो अभी 14 से 18 प्रतिशत है।
इस नीति के मुख्य आकर्षण में समग्र लॉजिस्टिक्स कार्ययोजना (सीएलएपी), वेयरहाउसिंग के नए मानक, लॉजिस्टिक्स सुगतमा लिए डिजिटल डैशबोर्ड (ई-लॉग्स) और यूनीफील्ड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूलिप) शामिल है। इनका इस्तेमाल केंद्र के विभाग प्रायोगिक तौर पर कर रहे थे। एक विश्लेषक ने कहा, ‘वेयरहाउसिंग मानकों का लक्ष्य विभिन्न राज्यों में गोदामों के मानकों में अंतर खत्म करना है।