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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर जारी वार्ताओं के संदर्भ में कहा कि किसी समझौते के न्यायसंगत, संतुलित एवं उचित नहीं होने पर भारत उसमें कोई जल्दबाजी नहीं दिखाता है।
उन्होंने कहा कि भारत में जमीनी हकीकत अब बदल गई है और इन समझौतों में भागीदार देशों की तरफ से की गई पेशकश भारत की तरफ से की जा रही पेशकश के मुकाबले ‘कुछ भी नहीं’ है।
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत को कभी भी व्यापार वार्ता में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसका असर आने वाले कई वर्षों तक देश पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी व्यापार वार्ता में समय लगता है क्योंकि दूसरे पक्षों को यह समझने में समय लगता है कि भारत में वास्तव में क्या हो रहा है, भारत की कहानी कैसे आगे बढ़ रही है, नया भारत कैसे उभर रहा है।’
भारत इस समय ब्रिटेन, ओमान और चार देशों के यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ एफटीए को अंतिम रूप देने के करीब है। ईएफटीए में आइसलैंड, लिकटनस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं।
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की अबू धाबी में होने वाली बैठक में शामिल होने वाले देशों के सकारात्मक रुख के साथ आने और विकासशील देशों की चिंताओं को सुने जाने की शुक्रवार को उम्मीद जताई।
गोयल ने ‘रायसीना डायलॉग’ परिचर्चा में शिरकत करते हुए कहा कि डब्ल्यूटीओ ने वैश्विक व्यापार के लिए मजबूत नियम स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है लेकिन इस संगठन में कई अहम समस्याएं भी हैं।
गोयल ने कहा कि भारत कार्बन कर मुद्दे को यूरोपीय संघ के साथ ‘बेहद’ दृढ़ता से उठाएगा और 27 देशों के संघ के साथ मिलकर इसका समाधान निकालेगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ भारत मुद्दे को अवसर में बदलने के लिए खुद को तैयार करेगा। गैर-शुल्क बाधाएं और कार्बन कर जैसे एकतरफा उपाय भारत के लिए चिंता का विषय हैं।