खाद्यान्न योजना के विस्तार पर सवाल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 4:30 PM IST

  भारत के गेहूं के भंडार में तेजी से कमी आ रही है और धान उत्पादक प्रमुख राज्यों में सूखे जैसी स्थिति के कारण चावल उत्पादन कम रहने का अनुमान है। इससे सरकार द्वारा 30 सितंबर के बाद मुफ्त अनाज वितरण योजना जारी रखने की क्षमता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
गेहूं के स्टॉक में कमी की वजह कम उत्पादन और निजी एजेंसियों द्वारा ज्यादा खरीद है। इससे अनाज खरीदने पर आने वाला सरकार का खर्च कुछ कम हुआ है। क्या यह बचत सितंबर के बाद मुफ्त अनाज वितरण योजना को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त होगा, यह बड़ा सवाल है। असल प्रश्न यह है कि क्या देश में गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार है, जिससे बगैर घरेलू कीमत में वृद्धि के प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना  को जारी रखा जा सके।
आईग्रेन इंडिया में जिंस विश्लेषक राहुल चौहान ने कहा, ‘चावल बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि इसका रकबा घटा है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में कम बारिश हुई है, जिससे कुल मिलाकर उत्पादन कम रह सकता है। पंजाब और हरियाणा में चावल का उत्पादन पिछले साल से 10 प्रतिशत कम या ज्यादा हो सकता है। पिछले साल की तुलना में उत्पादन कम से कम 1.5 करोड़ टन कम रह सकता है।’
भारत में गेहूं की अगली फसल 1 अप्रैल, 2023 से बाजार में आएगी। तब तक देश को घरेलू मांग पूरी करने के लिए अपने स्टॉक से काम चलाना होगा,  जो निजी व्यापारियों और केंद्र सरकार के पास है।
भंडार कम होने के डर से केंद्र सरकार ने मई की शुरुआत में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत करीब 55 लाख टन गेहूं की जगह चावल वितरण किया था। उसके बाद नियमित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में गेहूं की जगह 61 लाख टन चावल दिया गया। इसके माध्यम से सरकार ने करीब 1.1 करोड़ टन गेहूं का स्टॉक बनाने की कवायद की। मार्च 2020 में पीएमजीकेएवाई को कल्याणकारी योजना के रूप में पेश किया गया था, जिससे कोविड-19 महामारी के कारण संकट से जूझ रहे नागरिकों की जिंदगी आसान की जा सके।
इसके तहत एनएफएसए के लाभार्थियों को करीब 5 किलो अनाज दिया गया। उसके बाद यह योजना 6 बार बढ़ाई जा चुकी है। गेहूं के मौजूदा स्टॉक की स्थिति और भविष्य के वितरण के परिदृश्य के विश्लेषण से पता चलता है कि अगर केंद्र सरकार सितंबर के बाद पीएमजीकेएवाई को बढ़ाने का फैसला करती है और गेहूं और चावल देती है (मई में सिर्फ चावल दिया गया) तो उसे भंडार से 114 लाख टन गेहूं 31 मार्च 2023 तक देना पड़ेगा, जबकि बफर और रणनीतिक भंडार 75 लाख टन रखना होता है। अगर यह मानकर चलें कि केंद्र एनएफएसए और पीएमजीकेएवाई दोनों के तहत मौजूदा वितरण योजना जारी रखता है तो उसे बफर जरूरतों से 52 प्रतिशत से ज्यादा भंडार की जरूरत होगी। 

First Published : August 19, 2022 | 11:35 AM IST