अर्थव्यवस्था

चावल बाजार में उतार-चढ़ाव: भारत में निर्यात कमजोर, बांग्लादेश में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

अंतरराष्ट्रीय चावल बाजार में इस हफ्ते मिलाजुला रुझान देखने को मिला है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- April 26, 2024 | 4:30 PM IST

दुनियाभर में चावल के निर्यात मूल्य में गिरावट दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह कम मांग और बाजार में पहले से मौजूद पर्याप्त सप्लाई है। भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, वहां पिछले तीन महीनों में चावल की निर्यात कीमतें सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। 5% टूटी हुई लोकप्रिय किस्म, पारबॉइल्ड (उबले चावल) की कीमत इस हफ्ते घटकर 528-536 डॉलर प्रति टन हो गई है, जो पिछले हफ्ते 538-546 डॉलर प्रति टन थी।

गौरतलब है कि पिछले महीने ही यह रिकॉर्ड ऊंचाई पर 560 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थी। वहीं दूसरी तरफ, थाईलैंड में इस हफ्ते चावल के निर्यात मूल्य में खास बदलाव नहीं देखने को मिला है।

दक्षिण भारत के एक चावल निर्यातक ने चिंता जताई है कि एशियाई और अफ्रीकी देशों से चावल की मांग में भारी गिरावट आई है। उनका कहना है कि कुछ निर्यातक कम शुल्क देकर विदेशी खरीदारों को सस्ते दामों पर चावल बेच रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उबले चावल के निर्यात पर 20% शुल्क लगा दिया था।

अंतरराष्ट्रीय चावल बाजार में इस हफ्ते मिलाजुला रुझान देखने को मिला है। जहां भारत में चावल निर्यात मूल्य में गिरावट का सिलसिला जारी है, वहीं वियतनाम में 5% टूटे हुए चावल की कीमतें स्थिर रहीं। भारत में निर्यात कम होने का कारण कम मांग और विदेशी खरीदारों को कम शुल्क में चावल मिलना बताया जा रहा है। वहीं वियतनाम में आगामी राष्ट्रीय छुट्टियों के चलते व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ रही हैं, जिसका असर घरेलू धान चावल की कीमतों पर पड़ा है।

बाजार सोमवार से बुधवार तक बंद रहेंगे। दूसरी तरफ, थाईलैंड में 5% टूटे चावल की कीमतों में मामूली बढ़त देखी गई। इंडोनेशिया से मिल रही मांग और मजबूत मुद्रा ने थाईलैंड में चावल की कीमतों को सहारा दिया है। वरना यहां भी रेट स्थिर ही हैं।

बांग्लादेश में इस साल ग्रीष्मकालीन (summer) चावल उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, चावल का उत्पादन 20 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 20.50 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है।

क्योंकि किसानों ने बोरो धान की खेती का रकबा बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि बोरो धान ही बांग्लादेश के कुल चावल उत्पादन का आधे से भी ज्यादा हिस्सा होता है, जो आमतौर पर करीब 37 मिलियन मीट्रिक टन के आसपास होता है।

First Published : April 26, 2024 | 4:30 PM IST