राज्यों ने मांगा करों में ज्यादा हिस्सा, जीएसटी मुआवजा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 5:00 PM IST

राज्यों ने रविवार को नीति आयोग की संचालन परिषद के मंच का सहारा लेते हुए अपने घटते संसाधनों के मुद्दे को ​उठाया और मोदी सरकार से केंद्रीय करों में अपना हिस्सा बढ़ाने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे के विस्तार की मांग की। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में परिषद की बैठक का तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) द्वारा विरोध के तौर पर बहिष्कार किया गया। राज्यों का आरोप है कि राजग सरकार  ने राज्यों को उनके सुविधानुसार योजनाओं को बनाने और संशोधित करने की आजादी नहीं दी थी और आयोग देश में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए अनिवार्य है। राजग सरकार के सहयोगी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बैठक में मौजूद नहीं थे। उन्होंने स्वास्थ्य का हवाला देकर बैठक में शामिल नहीं  होने की बात की। हालांकि मोदी सरकार की विरोधी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बैठक में मौजूद रहीं। वह लगातार पिछली बैठकों का बहिष्कार कर रही थी।  

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयी राज्यों में उनके अनरूप विकास का मॉडल बनाए जाने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि इन राज्यों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक विशेष गोष्ठी होनी चाहिए। नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की बैठक में धामी ने कहा कि नीति आयोग द्वारा हिमालयी राज्यों में, यहां की परिस्थिति, जनसंख्या घनत्व, अस्थायी आबादी व पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए ही विकास का मॉडल बनाया जाए जो विज्ञान-प्रौद्योगिकी पर आधारित हो। प्रदेश के कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत बिन्दुओं की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि केंद्र पोषित योजनाओं को बनाते समय राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए और ‘सबके लिए एक योजना’ के स्थान पर राज्य के अनुकूल योजना तैयार की जाए। इस संबंध में उन्होंने पर्यटन तथा सगन्ध पौध आधारित योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे राज्य को अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा। 
इधर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र से अपनी मांग दोहराई कि वस्तु एवं सेवा कर लागू करने से राजस्व में आई कमी के एवज में राज्यों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की अवधि पांच साल के लिए बढ़ाई जाए। उन्होंने छत्तीसगढ़ को कोयला एवं अन्य प्रमुख खनिजों के बदले मिलने वाली रॉयल्टी की दरों में संशोधन की मांग भी रखी। नीति आयोग की संचालन समिति की सातवीं बैठक में बघेल ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति, कोयला ब्लॉक कंपनियों से ‘अतिरिक्त कर’ के रूप में एकत्रित राशि का स्थानांतरण और नक्सलवाद के सफाया के लिए राज्य सरकार के व्यय किए 11,828 करोड़ रुपये की भरपाई करना मांगें हैं। जीएसटी कर प्रणाली की वजह से राज्यों को राजस्व घाटा हुआ है। राज्य को अगले वर्ष होने वाले करीब 5,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे की क्षतिपूर्ति के लिए केंद्र ने कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है लिहाजा जीएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान जून 2022 के बाद अगले पांच वर्ष के लिए जारी रहना चाहिए। 

First Published : August 8, 2022 | 12:32 PM IST