Fixed deposits के लिए न करें जल्दी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 12:46 PM IST

कुछ बैंक 700 से 750 दिन की सावधि जमा (एफडी) पर 7 फीसदी से ज्यादा का ब्याज दे रहे हैं। मई के बाद से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रीपो दर में इजाफा करने के बाद से बैंक भी जमा पर ब्याज दर  लगातार बढ़ा रहे हैं। 
पैसा बाजार के वरिष्ठ निदेशक गौरव अग्रवाल के मुताबिक ऊंची खुदरा मुद्रास्फीति के साथ विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीति को लेकर अपनाए जा रहे सख्त रुख और रुपये पर दबाव के मद्देनजर मौद्रिक नीति समिति आगे भी रीपो दर में इजाफा कर सकती है। इसके फलस्वरूप बैंक आगे भी जमा दरों में बढ़ोतरी के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
मौजूदा सूरते हाल
तरलता यानी नकदी प्रवाह में आई कमी के बीच बैंकों ने उधारी मांग पूरी करने के लिए जमा दरों में इजाफा किया है लेकिन केंद्रीय बैंक की तरफ से रीपो दर में जितनी बढ़ोतरी की गई है उसके मुकाबले यह वृद्धि कम है। 
टीबीएनजी कैपिटल एडवाइजर्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी तरुण बिरानी के मुताबिक रीपो दर के मामले में जब तक हम टर्मिनल दर तक नहीं पहुंचते हैं तब तक दरों में बढ़ोतरी पर विराम की गुंजाइश नहीं है। 
फाई मनी की निवेश टीम के प्रणीत बतीना कहते हैं, ‘देश के केंद्रीय बैंक के द्वारा रीपो दर में जितनी वृद्धि की गई है उसके मुकाबले बैंकों ने सावधि जमा पर ब्याज दरों में बहुत कम इजाफा किया है। देश में ज्यादातर बैंक फिलहाल एक साल की सावधि जमा पर औसतन 5.7 प्रतिशत ब्याज दे रहे हैं जबकि 364 दिन वाला ट्रेजरी बिल 7.02 प्रतिशत पर कारोबार कर रहा है।’
बैंक लोन बुक में वृद्धि के साथ-साथ शुद्ध ब्याज आय को बढ़ाकर या तो शुद्ध ब्याज मार्जिन को बनाए रखने की या इसमें और वृद्धि की कोशिश कर लाभ अर्जित करने का प्रयास करते हैं। बिरानी कहते हैं, ‘इसलिए ऋण की बढ़ती मांग निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर विस्तार देगी। भले ही बैंकों के लिए बढ़ती उधारी लागत के कारण ऋण दरों में वृद्धि होगी, प्रतिस्पर्धी परिदृश्य और उनके अपने विकास लक्ष्य भी ब्याज दर में वृद्धि की गति को प्रभावित करेंगे।’ 
एसोसिएशन ऑफ रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की बोर्ड सदस्य रेणु माहेश्वरी कहती हैं, ‘सावधि जमा पर वास्तविक ब्याज दर अभी भी धनात्मक नहीं है। अगर सितंबर के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की बात करें तो सावधि जमा पर ब्याज दर अभी भी ऋणात्मक है। कर को घटाने के बाद सावधि जमा पर रिटर्न और भी कम हो जाता है।’
निवेशकों को क्या करना चाहिए
प्रणीत बतीना कहते हैं, ‘कुछ बैंक 700 से 750 दिन की सावधि जमा पर 7 प्रतिशत से ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। जो निवेशक जो सिर्फ सावधि जमा में निवेश करना चाहते हैं उनके लिए इस अवधि की एफडी में निवेश करना बेहतर हो सकता है।’ 
माहेश्वरी के मुताबिक अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश पर विचार कर रहे हैं तो आपको वित्तीय पेशेवरों की सलाह पर ध्यान देना चाहिए, खासकर यदि आप उच्च ब्याज दरों के कारण अच्छी खासी धनराशि लगाने पर विचार कर 
रहे हैं। 
माहेश्वरी कहती हैं, ‘हम अभी भी लंबी अवधि के लिए सावधि जमा में निवेश करने की सलाह नहीं देते हैं। तीन साल की सावधि जमा अभी भी ऋणात्मक रिटर्न के दायरे में हैं।’ बेशक, बचत खाते में धनराशि को रखने का कोई मतलब नहीं है। उतार-चढ़ाव भरे समय में दर में बदलाव के साथ बाजार को बहुत सटीकता के साथ आंकने की कोशिश न करें। 
सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार और वित्तीय नियोजन फर्म, हम फौजी इनिशिएटिव्स के मुख्य कार्याधिकारी संजीव गोविल कहते हैं, ‘अगर फिर भी कोई कुछ हद तक इसे आंकना चाहता है तो चार महीने का स्वत: नवीनीकरण वाला बैंक एफडी कराएं और दरें बढ़ने पर स्वत: नवीनीकरण को रोक दें।’ वैकल्पिक रूप से गोविल का कहना है कि एफडी के लिए अलग रखी गई निवेश योग्य राशि के साथ उच्च गुणवत्ता वाली कॉरपोरेट एफडी ली जा सकती है।
लघु वित्त बैंकों या सहकारी बैंकों को लेकर क्या करें?
लघु वित्त बैंक और मध्यम आकार के बैंक बड़े बैंकों की तुलना में अधिक दरों की पेशकश कर रहे हैं। सहकारी बैंक लघु वित्त बैंकों से भी बेहतर दरों की पेशकश कर सकते हैं। माईमनीमंत्रा डॉट कॉम के संस्थापक और प्रबंध निदेशक राज खोसला कहते हैं, ‘निवेश से पहले बैंक की प्रतिष्ठा का आकलन करें।’
बैंकों में 5 लाख रुपये तक की जमा धनराशि पर बीमा कवर का प्रावधान है। खोसला कहते हैं, ‘इसलिए जमा राशि को सीमित रखने का प्रयास करें ताकि बीमा कवर के दायरे में रहें। जमा करते समय ग्राहकों को बुकिंग और रखरखाव में आसानी पर भी विचार करना चाहिए।’ हालांकि कुछ सलाहकार ज्यादातर लघु वित्त बैंक में छोटी धनराशि लगाने का सुझाव देते हैं।
गोविल कहते हैं कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में लघु वित्त बैंक में जोखिम ज्यादा है। यदि कोई इसके साथ सहज है तो बैंक एफडी के लिए रखी गई धनराशि का एक छोटा सा हिस्सा वहां लगा सकते हैं। निवेशकों को अपने मौजूदा सावधि जमा की समीक्षा करती रहनी चाहिए और ज्यादा ब्याज मिलने पर उसे नई एफडी में बदल सकते हैं। खोसला कहते हैं कि निवेशक अलग-अलग परिपक्वता अवधि वाले एफडी में निवेश कर सकते हैं क्योंकि यह निवेशक को तरलता प्रदान करता है और फिर निवेश से संबंधित जोखिम को कम करता है।
कुछ विशेषज्ञ निवेश करें, इंतजार करें और देखें दृष्टिकोण का सुझाव देते हैं, क्योंकि यह बहुत लंबी अवधि की सावधि जमा लेने का समय नहीं है। गोविल के अनुसारअभी 12 महीने की एफडी में निवेश करें और जब दरें स्थिर हों तो लंबी अवधि की एफडी में निवेश किया जा सकता है।
12 से 15 महीने की अवधि के लिए एएए रेटिंग और उच्च गुणवत्ता वाली कॉरपोरेट सावधि जमा जिस पर अभी भी बेहतर ब्याज मिल रहा है, में निवेश पर विचार किया जा सकता है। लेकिन यदि आप अभी एफडी में ज्यादा निवेश करने के लिए दृढ़ हैं तो आपको अपने निवेश को 5 लाख रुपये के दो-तीन एफडी लेनी चाहिए। ब्याज दर के अलावा, वित्तीय संस्थान की विश्वसनीयता, चक्रवृद्धि ब्याज और कुल रिटर्न पर विचार करें। तीन साल से अधिक समय के लिए निवेश करते समय विशेषज्ञ वैकल्पिक निवेश का सुझाव देते हैं।
एफडी के विकल्प के तौर पर आप विचार कर सकते हैं
फिलहाल निवेशक बॉन्ड मार्केट में निवेश कर अच्छा रिटर्न भी कमा सकते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग निवेश ट्रस्ट का 1,500 करोड़ रुपये का एएए श्रेणी का गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर पर इस पर छमाही 7.90 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है, जो 8.05 प्रतिशत वार्षिक प्रतिफल के बराबर है। इसकी अवधि 25 वर्ष है।
एचडीएफसी का 10-वर्षीय एएए बॉन्ड पर 8.07 फीसदी ब्याज मिल रहा है और वार्षिक प्रतिफल 8.02 फीसदी है। श्रीराम ट्रांसपोर्ट, पीरामल और श्रीराम सिटी यूनियन से एए और एए+ रेटिंग वाले बॉन्ड 8.5 फीसदी से 10.5 फीसदी के बीच प्रतिफल दे रहे हैं। बॉन्ड्सइंडिया डॉट कॉम के संस्थापक अंकित गुप्ता कहते हैं कि अगर आप तीन से पांच साल की अवधि के लिए निवेश करते हैं तो इस बात की अच्छी संभावना है कि आप पूंजीगत लाभ अर्जित कर सकते हैं।’
बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को केवल रेटिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। एक बेहतर तस्वीर प्राप्त करने के लिए इकाई (कंपनी) की वित्तीय स्थिति–उसका आकार, वह जिस व्यवसाय में है और उसके ऋण का स्तर आदि का भी अध्ययन करें। जब आप निवेश करते हैं तो रेटिंग अच्छी हो सकती है लेकिन अगर फंडामेंटल में गिरावट आती है तो वे अचानक कई पायदान नीचे गिर सकते हैं।
मनीएडुस्कूल के संस्थापक अर्णव पंड्या कहते हैं, ‘म्युचुअल फंड के क्षेत्र में निवेशक बैंकिंग और पीएसयू डेट फंडों को देख सकते हैं जो 6.4-7.5 प्रतिशत के दायरे में परिपक्वता पर प्रतिफल की पेशकश कर रहे हैं। आप 2027-2032 में परिपक्व होने वाली लंबी अवधि के टारगेट मैच्योरिटी फंड पर भी विचार कर सकते हैं, जिनकी परिपक्वता पर रिटर्न अभी 7.14-7.66 फीसदी के बीच है।’

First Published : October 30, 2022 | 8:58 PM IST