इन्फ्लूएंसर को चुकाना होगा 10 फीसदी टीडीएस

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 5:51 PM IST

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने हाल में इस बारे में दिशानिर्देश जारी किए हैं कि किसी कारोबार या पेशे में प्राप्त लाभों से संबंधित स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के प्रावधान कैसे लागू होंगे। ये प्रावधान 1 जुलाई से प्रभावी होंगे। इन्हें आयकर अधिनियम, 1961 में एक नई धारा 194आर जोड़कर केंद्रीय बजट में पेश किया गया था।
इनके मुताबिक उस व्यक्ति द्वारा 10 फीसदी टीडीएस कटौती की जानी चाहिए, जो किसी निवासी भारतीय को कारोबार या पेशे के लिए एक साल में 20,000 रुपये से अधिक के लाभ या अनुलाभ मुहैया कराता है। यह प्रावधान उन लोगों या हिंदू अविभाजित परिवारों पर लागू नहीं होगा, जिनकी पूर्व वित्त वर्ष में कुल बिक्री, सकल प्राप्तियां या टर्नओवर कारोबार के मामले में 1 करोड़ रुपये और पेशे के मामले में 50 लाख रुपये से अधिक नहीं है।

किन पर होगा असर? 
इस प्रावधान का उन कारोबारों पर असर पड़ने के आसार हैं, जो डीलरों और फ्रेंचाइजर्स के साथ मिलकर काम करते हैं और उन्हें उनके प्रदर्शन या मार्केटिंग के उद्देश्य के आधार पर लाभ मुहैया कराते हैं।
पीएसएल एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में एसोसिएट पार्टनर सोएब कुरैशी ने कहा, ‘इसका सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर, कलाकार, बैंड आदि पर असर पड़ेगा, जिन्हें मार्केटिंग के उद्देश्य के लिए उत्पाद मुहैया कराए जाते हैं।’
इस प्रावधान के तहत कर योग्य लाभों या अनुलाभों में डीलर या बिज़नेस कॉन्फ्रेंस, घूमने-फिरने के लिए यात्रा होने वाला खर्च, लक्ष्य पूरा करने के आधार पर डीलरों को नकद या उत्पाद के रूप में दिए जाने वाले प्रोत्साहन, लॉयल्टी रिवॉर्ड, प्रोत्साहन के रूप में दिए जाने वाले उपहार, प्रायोजित बीमा, परिवार के लिए प्रायोजित टूर, सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर और डॉक्टर आदि को उत्पाद के रूप में दिए जाने वाले लाभ आदि शामिल हैं।
सोशल इन्फ्लूएंसर के बारे में विक्टोरियम लीगलिस-एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स के प्रबंध साझेदार आदित्य चोपड़ा ने कहा, ‘अगर सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर किसी कंपनी के मार्केटिंग प्रयासों के तहत दिए गए उपकरण को अपने पास रखते हैं तो उन्हें टीडीएस चुकाना होगा। अगर उपकरण को वापस लौटा दिया जाता है तो टीडीएस लागू नहीं होगा।’

लाभों में नकदी और उत्पाद शामिल 
धारा 194आर उन लाभों या अनुलाभों पर लागू होती है, जो नकदी या उत्पाद या आंशिक रूप से नकदी और आंशिक रूप से उत्पाद के रूप में मुहैया कराए जाते हैं। टैक्समैनेजर के मुख्य कार्याधिकारी दीपक जैन ने कहा, ‘अगर लाभ उत्पाद के रूप में मुहैया कराया गया है तो कटौती करने वाले को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्राप्तकर्ता लाभ के मूल्य पर अग्रिम कर का भुगतान करे। अन्यथा लाभ प्रदाता आयकर विभाग को टीडीएस का भुगतान कर सकता है, लेकिन उस टीडीएस को भी लाभ का एक हिस्सा माना जा सकता है।’

अगर प्राप्तकर्ता कर चुकाने के लिए जिम्मेदार नहीं है
यह मायने नहीं रखता है कि लाभार्थी लाभ पर कर चुकाने के लिए जिम्मेदार है या नहीं। टैक्समैन के उप महाप्रबंधक नवीन वाधवा ने कहा, ‘धारा 194आर के तहत किसी निवासी भारतीय को कोई लाभ या अनुलाभ मुहैया कराने वाले व्यक्ति पर टीडीएस कटौती की जिम्मेदारी डाली गई है। कटौती करने वाले को यह जांचने की जरूरत नहीं है कि प्राप्तकर्ता के हाथ में आई धनराशि कर योग्य है या नहीं या इस पर किस धारा के तहत कर लगना है।’

इन्हें छूट
कुछ लाभ धारा 194आर के दायरे में नहीं आते हैं। कुरैशी ने कहा, ‘इस प्रावधान में अधिनियम की धारा 17 (2) के तहत कर्मचारियों को दिए जाने वाले बिना किराये के आवास, कर्मचारियों को मुफ्त में सुविधाएं, किसी कोष के जरिये नियोक्ता द्वारा दी गई धनराशि और कुछ मामलों में कर्मचारी या उसके परिवार के इलाज के लिए भुगतान जैसे लाभों को बाहर रखा गया है।’

आपको क्या करना चाहिए
सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर को अपने कर परामर्शदाताओं से यह पता करना चाहिए कि उन्हें प्रचार के लिए मुहैया कराए गए प्रोत्साहन या उत्पादों पर कर लगेगा या नहीं। उन्हें प्रचार के उद्देश्य के लिए दिए गए उत्पाद को लौटाना चाहिए। धारा 194आर अस्पतालों को मुफ्त सैंपल के वितरण और किसी अस्पताल में नियोजित डॉक्टरों को मुफ्त में मिलने वाले दवाओं के सैंपल पर भी लागू होती है। अस्पताल ऐसे सैंपल को कर्मचारियों के लिए कर योग्य अनुलाभ मान सकते हैं और धारा 192 के तहत कर कटौती कर सकते हैं। धारा 192 वेतन आय पर टीडीएस से संबंधित है।
उन डॉक्टरों के मामले में, जो किसी अस्पताल में परामर्शदाता के रूप में काम करते हैं और मुफ्त सैंपल लेते हैं, टीडीएस पहले अस्पताल पर लागू होगा। इसके बाद अस्पताल को धारा 194आर के तहत परामर्शदाता डॉक्टरों का टीडीएस काटना होगा। चोपड़ा ने कहा, ‘आदर्श स्थिति को यह है कि डॉक्टरों को मुफ्त सैंपल लेने से दूर रहना चाहिए या उन्हें 20,000 रुपये से कम मूल्य के मुफ्त सैंपल लेने चाहिए ताकि वे इस धारा के तहत कर से बच सकें।’

First Published : July 4, 2022 | 12:09 AM IST