कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से लोगों में डिजिटल लेनदेन का चलन काफी बढ़ा है। इसके साथ ही मैलवेयर, फिशिंग और पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) के जरिये ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाएं भी दुनिया भर में बढ़ गई हैं। इंटरनेट उपभोक्ताओं की भारी संख्या वाला भारत भी जाहिर तौर पर इससे अछूता नहीं है।
पॉलिसीबाजार ने पिछले दिनों 4,500 से अधिक लोगों का ऑनलाइन सर्वेक्षण किया, जिसमें पता चला कि 20 फीसदी से अधिक लोगों को साइबर अपराधों के कारण वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है। लेकिन सर्वेक्षण में शामिल केवल 24 फीसदी लोगों ने ही साइबर बीमा पॉलिसी खरीदी थी। सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि उत्तर देने वाले अधिकतर (57 फीसदी) लोग अनधिकृत लेनदेन के कारण वित्तीय नुकसान का खतरा देखते हुए साइबर बीमा के जरिये सुरक्षा कवर चाहते हैं।
घर से काम करने वाले लोगों की संख्या में बढोतरी के साथ ही पारिवारिक साइबर कवर की आवश्यकता बढ़ गई है। पीएसएल एडवोकेट्स ऐंड सोलिसीटर के असोसिएट पार्टनर शोएब कुरैशी कहते हैं, ‘भारत ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं की संख्या के मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। भारत में ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं की संख्या 70 करोड़ से भी ज्यादा होने का अनुमान है। इसीलिए उनसे जुड़ी जानकारी यानी डेटा की सुरक्षा प्राथमिकता बन गई है।’
बेहद जरूरी है साइबर बीमा
जो कोई भी इस डिजिटल दुनिया का हिस्सा है, वह यहां मंडरा रहे जोखिम की जद में है। बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) टीए रामलिंगम कहते हैं, ‘अब हम मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, ई-कॉमर्स खरीदारी, सोशल मीडिया तथा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मनोरंजन जैसी रोजाना की जरूरतें पूरी करने के लिए अपने गैजेट्स पर काफी समय बिताते हैं।’
असोसिएशन ऑफ रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स (एआरआईए) के बोर्ड सदस्य लोवई नवलखी कहते हैं, ‘जो कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जाता है, उसे साइबर बीमा खरीदकर खुद को महफूज कर लेना चाहिए। उन लोगों के लिए तो यह कवर बेहद जरूरी है, जिनके साथ धोखाधड़ी का ज्यादा खतरा है, जैसे वरिष्ठ नागरिक।’
इंटरनेट का नया-नया इस्तेमाल सीखने वालों पर भी साइबर धोखाधड़ी का खतरा बहुत अधिक मंडराता है। रामलिंगम समझाते हैं, ‘साइबर बीमा आपको साइबर हमलों और खतरों के खिलाफ बीमा की सुरक्षा प्रदान करता है। यह ग्राहकों को किसी भी महत्वपूर्ण वित्तीय या अन्य संवेदनशील जानकारी की चोरी अथवा दुरुपयोग होने की स्थिति में हो रहा नुकसान कम
करता है।’
क्या हैं विकल्प
फिलहाल बजाज आलियांज, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, एचडीएफसी अर्गो, फ्यूचर जेनराली और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस इस तरह का बीमा कवर दे रही हैं। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के मुख्य कार्य अधिकारी और संस्थापक नवल गोयल बताते हैं, ‘पॉलिसी व्यक्तियों के लिए बनाई गई हैं। जीवनसाथी, बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा के लिए उनके लिए टॉप-अप लिया जा सकता है। फैमिली कवर पर विचार करें क्योंकि आजकल परिवार का लगभग हर सदस्य ऑनलाइन हो जाता है। प्रत्येक सदस्य के लिए अलग-अलग बीमा खरीदने के बजाय फैमिली फ्लोटर कम खर्चीला भी है।’
विभिन्न कंपनियों /प्रदाताओं के कवर मोटे तौर पर एक जैसे हैं मगर उनमें कुछ बारीक फर्क हो सकते हैं। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में प्रैक्टिस लीडर – देनदारी और वित्तीय जोखिम इवा साईवाल कहती हैं, ‘कुछ बीमाकर्ता खास प्लान देते हैं, जो छात्रों, उद्यमियों, परिवारों, वेतनभोगी पेशेवरों आदि को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। अन्य कंपनियां अलग- अलग बीमा राशि यानी सम अश्योर्ड के साथ व्यक्तिगत साइबर बीमा प्रदान करती हैं। ‘
बीमा में क्या शामिल नहीं
साइबर बीमा पॉलिसीधारकों को इंटरनेट पर धोखाधड़ी वाले लेनदेन से होने वाले नुकसान से महफूज रखती हैं, जो बैंक खातों, क्रेडिट या डेबिट कार्ड और मोबाइल वॉलेट के जरिये होते हैं।
साईवाल कहती हैं, ‘डेटा में सेंध, रैंसमवेयर के हमले, साइबर बुलीइंग, मैलवेयर की घुसपैठ या फिरौती मांगना इस पॉलिसी के तहत आते हैं। इसमें जांच, फोरेंसिक खर्च, डेटा रिकवरी और आईटी परामर्श सेवाओं से संबंधित खर्च भी शामिल हैं।’
यदि पॉलिसीधारक को ऐसी घटनाओं से मिले सदमे या तनाव से निपटने के लिए
मनोवैज्ञानिक /मनोचिकित्सक से परामर्श करना पड़ता है तो वहां हुआ खर्च भी इस बीमा पॉलिसी में शामिल होता है।
गोयल बताते हैं, ‘यह पॉलिसी आम तौर पर उन सभी गैजेट्स को कवर करती है जिनका उपयोग आप इंटरनेट के इस्तेमाल के लिए करते हैं। कुछ बीमाकर्ता पूरी दुनिया में आपको कवरेज देते हैं।’
मगर साइबर बीमा पॉलिसियों में कुछ बातें शामिल नहीं होतीं, जिनका पॉलिसीधारकों को पता होना चाहिए। रामलिंगम कहते हैं, ‘बेईमानी भरा और अनुचित आचरण, शारीरिक चोट, संपत्ति की क्षति, अवांछित संचार, डेटा का अनधिकृत संग्रह और अनैतिक या अश्लील सेवाएं इनमें कवर नहीं की जातीं।’
साइबर बीमा खरीद में न करें देरी
घर से काम करने वालों के लिए तो विशेषज्ञ खास तौर पर साइबर बीमा कवर खरीदने की सलाह देते हैं। सिक्योर नाउ के सह-संस्थापक कपिल मेहता कहते हैं, ‘ये पॉलिसी विशेष रूप से उन लोगों के लिए मायने रखती हैं जो लंबे समय के लिए ऑनलाइन रहते हैं और ऑनलाइन संसाधनों के जरिये काम करते हैं। वर्क फ्रॉम होम की वजह से पिछले कुछ वर्षों में यह जमात बहुत बड़ी हो गई है। यह कम खर्चीला कवर है, जहां आपको केवल 5,000 रुपये में समुचित सुरक्षा मिल सकती है।’