सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले इस कीमत पर भुना सकते हैं

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 2:55 PM IST

सॉवरिन  गोल्ड बॉन्ड (SGB) को आप मैच्योरिटी से पहले भी भुना सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आपने 29 मार्च 2016 और 30 सितंबर 2016 को जारी किए गए इस बॉन्ड में निवेश किया है तो आप एक बार फिर इसे क्रमश: इस महीने की 29 और 30 तारीख को भुना (prematurely redeem) सकते हैं।
नियमों के अनुसार सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल है लेकिन जारी किए जाने के 5 साल बाद अगले ब्याज भुगतान की तिथि पर आप इसे प्रीमैच्योरली भुना सकते हैं।
 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा 23 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, SGB के दोनों इश्यू का रिडेम्प्शन प्राइस 4,952 रुपये प्रति यूनिट (1 यूनिट = 10 ग्राम) होगा। रिडेम्प्शन प्राइस 19  सितंबर से 23 सितंबर के बीच इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की तरफ से जारी सोने के क्लोजिंग प्राइस का औसत है। 29 मार्च 2016 को जारी SGB के लिए यह चौथा जबकि 30 सितंबर 2016 को जारी किए गए SGB के लिए यह तीसरा प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन होगा।
 मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन को लेकर नियम
 SGB का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल है। लेकिन इस बॉन्ड को पांच साल के बाद prematurely redeem करने का विकल्प होता है। जिसका इस्तेमाल ब्याज भुगतान की तारीख पर किया जा सकता है। साथ ही वैसे बॉन्ड धारक जिन्होंने demat form में भी बॉन्ड लिया है वे तो कभी भी स्टॉक एक्सचेंज पर इसे बेच सकते हैं यानी RBI द्वारा नोटिफाई की गई तारीख से शेयर बाजार में इसका ट्रेड किया जा सकता है। लेकिन मैच्योरिटी से पहले इस बॉन्ड को भुनाने पर टैक्स का प्रावधान है। 
 29 मार्च 2016 को जारी SGB का इश्यू प्राइस 2,916 रुपये प्रति यूनिट था जबकि इस बॉन्ड के लिए इंटरेस्ट छमाही आधार पर यानी साल में दो बार 29 सितंबर और 29 मार्च को देय है। बॉन्ड के मैच्योरिटी की तारीख 29 मार्च 2024 है।
 वहीं 30 सितंबर 2016 को जारी बॉन्ड का इश्यू प्राइस 3,150 रुपये प्रति 10 ग्राम था जबकि इंटरेस्ट  30 मार्च और 30 सितंबर को देय है। बॉन्ड के मैच्योरिटी की तारीख 30 सितंबर 2024 है।
 प्रीमैच्योर रिडेंप्शन पर टैक्स ?
 अगर आप  सॉवरिन  गोल्ड बॉन्ड को उसकी मैच्योरिटी यानी 8 साल तक होल्ड करते हैं तो रिडेम्प्शन के समय आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन अगर आपने मैच्योरिटी पीरियड  (8 साल) से पहले रिडीम किया तो टैक्स फिजिकल गोल्ड की तरह ही लगेगा। मतलब टैक्स आपको होल्डिंग पीरियड (खरीदने के दिन से लेकर बेचने के दिन तक की अवधि) के आधार पर देना होगा।
 नियमों के अनुसार खरीदने के बाद अगर आप इस बॉन्ड को 36 महीने से पहले बेच देते हैं तो होने वाली कमाई यानी लाभ को शार्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा। जो आपके ग्रॉस टोटल इनकम में जोड़ दिया जाएगा और आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा।
लेकिन अगर आप खरीदने के 36 महीने बाद बेचते हैं तो लाभ यानी रिटर्न पर इंडेक्सेशन के फायदे के साथ 20 फीसदी (सेस और सरचार्ज मिलाकर 20.8 फीसदी) लॉंग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स देना होगा। इंडेक्सेशन के तहत महंगाई के हिसाब से पर्चेज प्राइस को बढा दिया जाता है, जिससे लाभ/कैपिटल गेन कम हो जाता है और टैक्स में बचत होती है।
 SGB पर प्रत्येक वित्त वर्ष 2.5 फीसदी ब्याज भी मिलता है। लेकिन इस ब्याज पर टैक्स में छूट नहीं है। मतलब यह ब्याज अन्य स्रोतों से होने वाली आय के तौर पर आपके ग्रॉस इनकम में जुड़ जाएगा और आपको टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा। एक बात और, सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड पर टीडीएस का प्रावधान नहीं है। 

First Published : September 26, 2022 | 7:55 PM IST