सोने की तर्ज पर जब से सिल्वर (चांदी) ईटीएफ की शुरुआत भारत में हुई है, इसमें निवेश को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ी है। जो लोग निवेश के नजरिये से फिजिकल चांदी (चांदी की सिल्ली, सिक्का और गहने) खरीदते थे, वे अब पेपर फॉर्म यानी सिल्वर ईटीएफ की तरफ रुख करने लगे हैं। नवंबर 2021 में सेबी ने इस नए संपत्ति वर्ग में निवेश को हरी झंडी दी थी। तब से लेकर इस वर्ष जुलाई के अंत तक म्युचुअल फंड कंपनियों ने सिल्वर ईटीएफ के जरिये कुल 1,400 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
अब तक आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्युचुअल फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड और निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड ने सिल्वर ईटीएफ शुरू किया है। इसके अलावा इनमें से हरेक एसेट मैनेजमेंट कंपनी के पास सिल्वर फंड ऑफ फंड्स भी है, जो अपने-अपने ईटीएफ में निवेश करते हैं। इनके अलावा डीएसपी म्युचुअल फंड और एचडीएफसी म्युचुअल फंड के सिल्वर ईटीएफ के न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) 26 अगस्त को बंद हुए हैं। एडलवाइस का गोल्ड -सिल्वर एफओएफ (गोल्ड और सिल्वर में 50-50 के अनुपात में) फिलहाल निवेशकों के लिए खुले हैं।
कुल मिलाकर कहें तो जब से सिल्वर ईटीएफ शुरू करने की अनुमति मिली है, असेट मैनेजमेंट कंपनियों में इसे लाने की होड़ मची है। जानकारों के अनुसार सेबी के कदम ने म्युचुअल फंड कंपनियों के लिए सिल्वर ईटीएफ का रास्ता खोल दिया है क्योंकि बहुत से निवेशक चांदी को महंगाई के खिलाफ हेजिंग के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। ऐसे में इससे उन्हें फिजिकल फॉर्म में चांदी रखने के बजाय पेपर फॉर्म में इसे रखने का विकल्प मिला है।
ईटीएफ में निवेश का एक और बड़ा फायदा यह है कि इसमें चांदी के रखरखाव और सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है। सिल्वर ईटीएफ के जरिए निवेशकों को सोने के बाद पारदर्शिता के साथ एक जिंस के रूप में चांदी में निवेश करना काफी आसान हो जाएगा।
हाल के समय में चांदी का प्रदर्शन कमजोर रहा है यानी कीमतें कमजोर हुई है। पिछले एक महीने में चांदी की कीमत तकरीबन 10 फीसदी, तीन महीने में 16 फीसदी, और एक साल में 25 फीसदी कम हुई है। इस वजह से भी एएमसी सिल्वर ईटीएफ और एफओएफ ला रहे हैं क्योंकि गिरावट का दौर किसी भी संपत्ति वर्ग में निवेश के लिए उचित समय होता है।
बढ़ती औद्योगिक मांग की वजह से भी इस संपत्ति वर्ग के लिए निवेशक और म्युचुअल फंड कंपनियां उत्साहित हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर और 5जी जैसे नए दौर के उद्योगों में चांदी की भारी मांग है। सोने और चांदी में निवेश से पोर्टफोलियो में विविधता की जरूरत भी पूरी हो जाती है।
लेकिन सिल्वर ईटीएफ में निवेश से पहले कुछ बातों को जानना जरूरी है:
निवेश की सीमा
गोल्ड ईटीएफ की तरह सिल्वर ईटीएफ में भी निवेशकों को प्रति यूनिट (एक ग्राम) निवेश का मौका मिलता है। उदाहरण के तौर पर अगर चांदी की कीमत 55 हजार रुपये प्रति किलो है तो एक यूनिट एक ग्राम की कीमत यानी 55 रुपये के बराबर होगी। कुछ फंड हाउस एनएफओ के दौरान कम से कम (न्यूनतम) 100 रुपए से निवेश की सुविधा भी देते हैं। अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। ध्यान रहे सिल्वर ईटीएफ में चांदी केवल अंतर्निहित परिसंपत्ति (अंडरलाइंग एसेट) है। इन्हें भुनाने पर चांदी नहीं मिलेगी बल्कि उसकी कीमत रुपये में मिल जाएगी। लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन यानी एलबीएमए पर चांदी की दैनिक कीमतों के आधार पर सिल्वर ईटीएफ के शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) में बदलाव होता है। ईटीएफ का एनएवी असेट मैनेजमेंट कंपनी की वेबसाइट पर डाला जाता है। एनएवी की कीमत म्युचुअल फंड की तरह बाजार बंद होने के बाद निर्धारित की जाती है।
एएमसी अपने फंड की 95 फीसदी रकम चांदी और इससे जुड़े उत्पादों में निवेश करते हैं। ये उत्पाद एलबीएमए की ओर से प्रमाणित होने चाहिए।
ट्रेडिंग
सिल्वर ईटीएफ को आप स्टॉक एक्सचेंज पर नकद ट्रेडिंग के लिए निर्धारित समय के दौरान कभी भी खरीद या बेच सकते हैं। इसके अलावा जब फंड हाउस एनएफओ लाते हैं तब भी आप सिल्वर ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं। एनएफओ के बाद फंड की यूनिट शेयर बाजार पर सूचीबद्ध होती हैं। फिर इन्हें वहां से खरीदा और बेचा जा सकता है। सिल्वर ईटीएफ के लिए डीमैट और ट्रेडिंग खाता होना जरूरी है। लेकिन सिल्वर के फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) के लिए आम म्युचुअल फंड स्कीम की तरह डीमैट अकाउंट जरूरी नहीं है।
खर्च
सिल्वर ईटीएफ संभालने के एवज में फंड हाउस निवेशक से शुल्क वसूलते हैं, जिसे टोटल एक्सपेंस रेश्यो (टीईआर) कहते हैं। इसके अतिरिक्त जब भी आप यूनिट खरीदते या बेचते हैं तो ब्रोकरेज शुल्क देना पड़ता है। सिल्वर फंड (एफओएफ) को एक निश्चित अवधि से पहले भुनाने पर एक्जिट लोड भी चुकाना होता है। सेबी के दिशानिर्देशों के अनुसार टोटल एक्सपेंस रेश्यो दैनिक एनएवी का अधिकतम 1 फीसदी हो सकता है। सिल्वर ईटीएफ के चयन में आपको टीईआर पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर किसी फंड हाउस का टीईआर कम है तो उसे प्राथमिकता दें।
तरलता
सिल्वर ईटीएफ को स्टॉक एक्सचेंज पर कभी भी खरीदा बेचा जा सकता है। मतलब तरलता की समस्या यहां नहीं है।
ट्रैकिंग एरर
सिल्वर ईटीएफ में तय बेंचमार्क यानी चांदी की कीमत के आधार पर निवेश होता है। इस बेंचमार्क के प्रतिफल और फंड के प्रतिफल के बीच के अंतर को ही ट्रैकिंग एरर माना जाता है। फंड हाउस को इस ट्रैकिंग एरर की जानकारी निवेशकों को देनी होती है। ट्रैकिंग एरर जितना कम हो उतना बेहतर। ट्रैकिंग एरर दिखाता है फंड उसमें निहित संपत्ति के मुकाबले कितना फीका प्रदर्शन कर रहा है। सेबी के दिशानिर्देशों के अनुसार एनएवी और बेंचमार्क चांदी की कीमतों के बीच ट्रैकिंग एरर 2 फीसदी से ज्यादा नहीं होने चाहिए। सिल्वर ईटीएफ में निवेश से पहले इस ट्रैकिंग एरर का भी ख्याल रखें।
कराधान
सिल्वर ईटीएफ और सिल्वर फंड पर कर डेट फंड की तरह लगता है। मतलब अगर खरीदने के बाद 36 महीने से पहले उसे भुना लेते हैं तो जिस वर्ष आप भुनाते हैं उस वर्ष प्रतिफल आपकी वार्षिक आय में जुड़ जाएगा और आपको लागू स्लैब के हिसाब से कर चुकाना पड़ेगा। अगर 36 महीने बाद भुनाते हैं तो इंडेक्सेशन के फायदे के साथ 20 फीसदी (उपकर और अधिभार मिलाकर 20.8 फीसदी) दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर चुकाना पड़ेगा।