एफएमपी (FMP): निवेश से पहले क्या जानना है जरूरी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:30 PM IST

 
बैंकों में किए जाने वाले फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी या FD) के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि म्यूचुअल फंड (mutual fund या MF) की debt कैटेगरी के अंतर्गत भी एक ऐसी स्कीम है जिसमें आपको एक निश्चित अवधि के निवेश पर तकरीबन निश्चित (indicative) return मिलता है? इसका नाम है फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (Fixed Maturity Plan या FMP)। यह स्कीम उन निवेशकों के लिए अच्छी है जो ब्याज दर में उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचना चाहते हैं और सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) में निवेश को प्राथमिकता देते हैं। टैक्स में बचत के मामले में भी यह बैंक FD के मुकाबले थोड़ी बेहतर है क्योंकि इस स्कीम पर इंडेक्सेशन बेनिफिट मिलता है बशर्ते आप 36 महीने या इससे ज्यादा के FMP प्लान में निवेश कर रहे हों।
 
क्या है FMP?

FMP mutual fund की एक क्लोज-एंडेड (close-ended) डेट फंड स्कीम है। इसमें निवेशक सिर्फ स्कीम के लॉन्चिंग के समय यानी न्यू फंड ऑफर (NFO) के दौरान ही निवेश कर सकते हैं। जबकि रिडीम (redeem) करने का विकल्प मैच्योरिटी पीरियड के बाद है। इस स्कीम के तहत फंड हाउस FMP स्कीम की मैच्योरिटी पीरियड के समान मैच्योरिटी वाले फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज (fixed income securities) जैसे मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स, सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड, बैंक एफडी वगैरह में निवेश करते हैं। फंड मैनेजर इस बात का भी ख्याल रखते हैं कि वे सभी इंस्ट्रूमेंट्स जिनमें निवेश कर रहे हैं, एक ही समय में मैच्योर हों।
 
कितना रिटर्न?
इस स्कीम की लॉन्चिंग के समय ही फंड हाउस निवेशकों को स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट (scheme information document) में इस बात की जानकारी दे देते हैं कि वे किस स्कीम के तहत किस-किस इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करेंगे। इससे निवेशकों को स्कीम के रिटर्न के बारे में मोटे तौर पर जानकारी मिल जाती है।
 
लिक्विडिटी की कितनी सहूलियत?
 
यह क्लोज-एंडेड फंड हैं। इसलिए इन्हें केवल स्टॉक एक्सचेंज पर बेचा जा सकता है, जहां ये लिस्टेड होते हैं। लेकिन इन यूनिट्स में ट्रेडिंग न के बराबर होती है। इससे इनकी लिक्विडिटी पर असर पड़ता है। लिहाजा, निवेशकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे मैच्योरिटी तक निवेश जारी रखें।
 
कितना टैक्स?
 
अन्य MF स्कीम की तरह इसमें भी निवेश के दो प्लान — ग्रोथ (growth) और डिविडेंड (dividend) — में से एक चुनने का विकल्प है। ग्रोथ प्लान में रिटर्न स्कीम के बीच में नहीं मिलता यानी रिटर्न रिडेम्पशन (redemption) से पहले नहीं मिलता। FMP एक डेट फंड है, इसलिए इस पर तीन साल से ज्यादा की होल्डिंग पीरियड (holding period) के बाद मिलने वाले रिटर्न पर इंडेक्सेशन बेनिफिट (Indexation benefit) के साथ 20.8 फीसदी (4 फीसदी सेस मिलाकर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (एलटीसीजी या LTCG) का प्रावधान है। Indexation benefit, यानी इन्फ्लेशन को एडजस्ट करने के बाद मिलने वाले रिटर्न, के चलते FMP में निवेश पोस्ट-टैक्स रिटर्न के हिसाब से बेहतर है। लेकिन 3 साल से कम अवधि की स्कीम के लिए मिलने वाले रिटर्न यानी शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर निवेशक को टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ता है। दूसरी तरफ अगर आप डिविडेंड प्लान लेते हैं तो आपको स्कीम के बीच जो रिटर्न डिविडेंड के रूप में मिलता है, वह आपके टोटल इनकम में जुड़ जाएगा और आपको आपके टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्स चुकाना होगा।
 
कैसे उठाएं इस स्कीम का ज्यादा फायदा?
 

Indexation benefit के चलते तीन साल से ज्यादा मैच्योरिटी वाली स्कीम में निवेश पोस्ट-टैक्स रिटर्न के लिहाज से बेहतर है। वैसे भी तीन साल से थोडी-सी भी ज्यादा अवधि की स्कीम पर तीन की जगह चार साल के लिए indexation (डबल इंडेक्सेशन) का फायदा मिल जाता है। फंड हाउस इस स्कीम की लॉन्चिंग को लेकर डबल इंडेक्सेशन बेनिफिट का ख्याल भी रखते हैं। 
 

उदाहरण से इसे समझते हैं:

 
पिछले महीने SBI की FMP सीरीज 68 लॉन्च हुई जिसका NFO 15 सितंबर को खुला और 21 सितंबर को बंद हो गया। इस स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 1,302 दिन है। मतलब यह स्कीम अप्रैल 2026 में मैच्योर होगी। इस प्लान की मैच्योरिटी पीरियड 36 महीने से थोड़ा ज्यादा होने की वजह से indexation benefit तीन वित्त वर्ष के बजाय चार वित्त वर्ष यानी 2022-23, 2023-24, 2024-25, 2025-26 के लिए मिलेगा।
 
लेकिन ऊंची महंगाई दर और ब्याज दरों में लगातार की जा रही बढ़ोतरी के बीच निवेशक कम अवधि के FMP में भी निवेश कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे अगर इस स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 36 महीने से कम है तो कैपिटल गेन पर indexation benefit नहीं मिलेगा।
 

First Published : October 20, 2022 | 12:06 PM IST