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हिंद-प्रशांत क्षेत्र की जटिलताओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी: राजनाथ

भारतीय सेना द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

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भाषा   
Last Updated- September 26, 2023 | 10:57 PM IST

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की जटिलताओं से निपटने और क्षेत्र में समृद्धि, सुरक्षा तथा समावेशी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को ‘सामूहिक प्रयास’ करने का आह्वान किया।

13वें हिंद-प्रशांत सेना प्रमुख सम्मेलन (आईपीएसीसी) में सिंह ने कहा कि राष्ट्रों को यह समझना चाहिए कि वैश्विक मुद्दों में कई हितधारक शामिल हैं और कोई भी देश अकेले इन चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकता। उनकी यह टिप्पणी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक सैन्य व्यवहार पर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच आई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (दुनिया एक परिवार है) के प्राचीन भारतीय लोकाचार के अनुरूप हासिल की जा सकती है।

भारतीय सेना द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि हिंद-प्रशांत अब एक नौवहन रचना ही नहीं है, बल्कि एक पूर्ण भू-रणनीतिक रचना है, और यह क्षेत्र सीमा विवादों और समुद्री दस्यु सहित विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।

रक्षा मंत्री ने अमेरिकी लेखक स्टीफेन आर कोवी के एक सैद्धांतिक मॉडल के माध्यम से क्षेत्र के लिए अपने दृष्टिकोण को समझाया, जो ‘सर्कल ऑफ कन्सर्न’ और ‘सर्कल ऑफ इन्फ्लुएंस’ पर आधारित है।

भारत का दृष्टिकोण शांतिपूर्ण समाधान पर

सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने मंगलवार को कहा कि हिंद-प्रशांत के लिए भारत का दृष्टिकोण क्षेत्र में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर और बलप्रयोग से बचने पर जोर देता है। उनके ये बयान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता और पूर्वी लद्दाख में जारी सीमा विवाद की पृष्ठभूमि में आए हैं।

First Published : September 26, 2023 | 10:49 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)