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उत्तर पूर्व में हाथियों की गिनती में देरी, जून 2025 तक आ सकते हैं अंतिम आंकड़े

मेघालय के मुख्य वन्यजीव वार्डन एस एम सहाय ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि नई पद्धति के साथ हाथियों की गिनती में कुछ समय लग रहा है।

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भाषा   
Last Updated- August 13, 2024 | 12:38 PM IST

भारत में हाथियों की ताजा गणना के परिणाम के लिए अगले साल जून तक इंतजार करना होगा क्योंकि उत्तर पूर्व के कुछ राज्यों में गिनती में देरी हुई है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

जंगली हाथी भारत के चार क्षेत्रों के जंगली, पहाड़ी इलाकों में पाए जाते हैं। इनमें उत्तर में हिमालय की तराई, पूर्वोत्तर राज्य, पूर्व-मध्य भारत तथा देश के दक्षिणी भागों में पश्चिमी और पूर्वी घाट हैं।

एक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उत्तर पूर्व राज्यों से आंकड़ों का संकलन और विश्लेषण अभी पूरा नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार इस क्षेत्र में हाथियों की गिनती में देरी के प्रमुख कारणों में ‘‘भारी मानसूनी बारिश, बाढ़ और वन कर्मियों की सीमित क्षमता’’ हैं।

मेघालय के मुख्य वन्यजीव वार्डन एस एम सहाय ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि नई पद्धति के साथ हाथियों की गिनती में कुछ समय लग रहा है।

असम के मुख्य वन्यजीव वार्डन संदीप कुमार ने कहा कि कठिन भूभाग, मानसूनी बारिश और बाढ़ के अलावा, इस अभ्यास में इसलिए भी अधिक समय लग रहा है क्योंकि विभाग ने वन क्षेत्रों के साथ-साथ हाथियों की आवाजाही वाले राजस्व क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया।

First Published : August 13, 2024 | 12:38 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)