सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग सचिव अनुराग जैन ने रविवार को कहा कि सरकार उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में निर्माणाधीन सुरंग के ढहने के बाद उसमें पिछले 7 दिनों से फंसे 41 श्रमिकों को मल्टीविटामिन, अवसादरोधी दवाओं के साथ ही सूखे मेवे भेज रही है। जैन ने कहा, ‘सौभाग्य से, अंदर रोशनी है क्योंकि बिजली चालू है। वहां एक पाइपलाइन है और इसलिए पानी उपलब्ध है। चार इंच की एक पाइप है, जिसका उपयोग ‘कंप्रेशन’ (दबाव) के लिए किया गया था। उसके माध्यम से, हम पहले दिन से खाद्य सामग्री भेज रहे हैं।’
जैन ने उत्तरकाशी सुरंग बचाव अभियान पर अद्यतन जानकारी मुहैया कराने के लिए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि सुरंग के अंदर दो किलोमीटर के हिस्से में पानी और बिजली उपलब्ध है, जो उत्तरकाशी के सिल्क्यारा में 4.531 किलोमीटर लंबी दो लेन वाली सुरंग का तैयार हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘हम उत्तरकाशी के सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों को मल्टीविटामिन, अवसादरोधी दवाएं और सूखे मेवे भेज रहे हैं।’
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिलक्यारा सुरंग केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी चारधाम ‘आलवेदर सड़क’ (हर मौसम में आवाजाही के लिए खुली रहने वाली सड़क) परियोजना का हिस्सा है। सुरंग का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के तहत किया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने शनिवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की थी, जिसमें श्रमिकों को बचाने के लिए पांच विकल्पों पर विभिन्न एजेंसियों के साथ चर्चा की गई।
एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद को सभी केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय का प्रभारी बनाया गया है और उन्हें सिलक्यारा में तैनात किया गया है। फंसे हुए श्रमिकों तक शीघ्र पहुंच बनाने विभिन्न एजेंसियों को लगाया गया है जिनमें ओएनजीसी, आरवीएनएल, सतलुज जल विकास निगम लिमिटेड, बीआरओ और राज्य पीडब्ल्यूडी, एनएचआईडीसीएल शामिल हैं।
सिलक्यारा सुरंग के एक हिस्से के ढहने के आठवें दिन रविवार को उसमें फंसे 41 श्रमिकों को बाहर निकालने की कवायद में तेजी आई है जिसके तहत सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) सुरंग के ऊपर से ‘लंबवत ड्रिलिंग’ शुरू करने के लिए रास्ता बनाने में जुटा है।
मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि उम्मीद है कि बीआरओ द्वारा बनाया जा रहा रास्ता दोपहर तक तैयार हो जाएगा जिससे सुरंग के ऊपर चिह्नित बिंदु तक मशीनें पहुंचाने के बाद ‘लंबवत ड्रिलिंग’ शुरू की जा सके।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है और उन्हें जल्द बाहर निकालना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ मौके पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विषम हिमालयी परिस्थितियों को देखते हुए बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यहां मिट्टी का स्तर एक समान नहीं है और यह मुलायम और कठोर दोनों है जिससे यांत्रिक अभियान चलाया जाना मुश्किल है।
मौके पर बचाव कार्यों की समीक्षा करने के बाद गडकरी ने संवाददाताओं को बताया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिकी ऑर्गर मशीन से मलबे में क्षैतिज ड्रिलिंग करके सुरंग में फंसे श्रमिकों तक सबसे जल्दी पहुंचने का तरीका है।