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J&K: लोकसभा ने जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए दो विधेयक पारित किए

तृणमूल कांग्रेस की अपरूपा पोद्दार ने कहा कि केवल आरक्षण संबंधी विधेयकों से कश्मीर के लोगों की स्थिति ठीक नहीं होगी।

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भाषा   
Last Updated- February 06, 2024 | 8:25 PM IST

जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को हटाकर ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है’ का संदेश दिया है।

लोकसभा ने जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित दो विधेयकों को मंगलवार को मंजूरी दी। सदन ने विधेयकों पर चर्चा और सामाजिक न्याय मंत्री वीरेंद्र कुमार तथा जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा के जवाब के बाद ‘संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जातियां आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ और ‘संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जनजातियां आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ को मंजूरी दी।

‘संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जातियां आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ में वाल्मीकि समुदाय को चूड़ा, बाल्मीकि समुदाय के समानार्थी के रूप में जोड़ने का प्रावधान है। ‘संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जनजातियां आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ में जम्मू कश्मीर में अनुसूचित जनजातियों की सूची में चार समुदायों को जोड़ने का प्रावधान है।

ये गड्डा ब्राह्मण, कोली, पडारी कबीला और पहाड़ी जातीय समूह हैं। चर्चा के जवाब में वीरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद उन समुदायों को समान अधिकार मिल रहा है जिन्हें लंबे समय से अधिकार नहीं मिला था।

कुमार ने कहा कि विपक्षी सदस्य नए संसद भवन के उद्घाटन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित नहीं किये जाने का मुद्दा उठा रहे हैं तो वे बताएं कि विपक्ष ने उन्हें निर्विरोध क्यों नहीं चुना।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विधेयक के कानून के बाद जम्मू कश्मीर में अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण और विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलेगा। कुमार ने स्पष्ट किया कि एससी और एसटी के लिए छात्रवृत्ति किसी भी तरह बंद नहीं की गई है और अब यह पैसा छात्रों के खातों में प्रत्यक्ष अंतरण के माध्यम से जाता है।

जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को हटाकर ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है’ का संदेश दिया है।

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ का उल्लेख करते हुए दावा किया कि झारखंड में यात्रा के दौरान राहुल को बिरसा मुंडा के जन्मस्थान उलिहातू जाने का समय नहीं मिला, यह उनकी सोच को दिखाता है।

दोनों मंत्रियों के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से ‘संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जातियां आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ और ‘संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जनजातियां आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ को मंजूरी दी।

इससे पहले दोनों विधेयकों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के अमर सिंह ने सरकार से आग्रह किया कि वह जम्मू कश्मीर के गुज्जर बक्करवाल समुदाय को मिलने वाले आरक्षण में कटौती करके अन्य जनजातियों को नहीं दे।

उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर ही नहीं देश में जनजातीय समुदायों एवं वंचितों के ऊपर अत्याचार बढ़े हैं। जनजातीय कार्य मंत्री मुंडा ने साफ किया कि जम्मू कश्मीर में गुज्जर बक्करवाल समुदाय के आरक्षण में कोई कटौती नहीं की गई है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि तत्कालीन राज्य जम्मू कश्मीर की जनता बहुत ही परेशान थी, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण के प्रावधान वाला मसौदा कानून बनाकर तथा इन दो संशोधन विधेयकों के जरिये मोदी सरकार ने इन जनजातियों और ओबीसी को इंसाफ दिलाने की कवायद की है, जो सराहनीय है।

द्रमुक के डी रवि कुमार ने भी चर्चा में अपने विचार व्यक्त किये। बसपा के मलूक नागर ने सरकार से अनुरोध किया कि कोई भी आरक्षण दूसरी जनजातियों के हिस्से से काटकर नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने देश की सीमा पर सेना को मदद करने वाले गुज्जर बक्करवाल परिवारों के लिए स्कूल-कॉलेज बनाने की अपील भी की।

तृणमूल कांग्रेस की अपरूपा पोद्दार ने कहा कि केवल आरक्षण संबंधी विधेयकों से कश्मीर के लोगों की स्थिति ठीक नहीं होगी। उन्होंने ऐसे समुदायों के लिए खोले गये एकलव्य विद्यालयों में 38,000 पद रिक्त होने का मुद्दा भी उठाया। वाईएसआरसीपी की जी माधवी और बीजद के रमेश मांझी ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।

शिवसेना के अरविंद सावंत सावंत ने भी चर्चा में भाग लिया। जदयू के दिलेश्वर कामैत ने विधेयक का समर्थन करते हुए बिहार में भी कुछ जातियों को एससी/एसटी में शामिल करने की अपील की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने छोटे-छोटे विधेयकों के बजाय आरक्षण से संबंधित एक समग्र विधेयक पेश करने की सलाह सरकार को दी।

भाजपा के भोला सिंह ने कहा कि इस विधेयक के कानून में परिवर्तित हो जाने के बाद वाल्मीकि समुदाय के वंचित लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी ने कहा कि बक्करवाल को प्राप्त आरक्षण में कटौती किये बिना अन्य समुदायों को यह आक्षण दिया जाए और सरकार इसे लेकर सदन को भरोसा दिलाए।

द्रमुक के डीएनवी सेंथिलकुमार एस. ने अपने संसदीय क्षेत्र में एकलव्य स्कूल स्थापित करने की मांग की। उन्होंने जातिगत जनगणना कराये जाने की भी आवश्यकता जताई। भाजपा की तापिर गाव ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद और पंचायती राज, नगर निकाय और विधानसभा में आरक्षण की व्यवस्था के बाद यह कहा जा सकता है कि कश्मीर स्वर्ग से सुंदर है।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि लद्दाख के लोगों की छठी अनुसूची से जुड़ी मांग पूरी की जाए। बसपा के राम शिरोमणि वर्मा ने कहा कि सरकार को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के रोजगार के व्यवस्था करनी चाहिए। भाजपा की सुनीता दुग्गल ने कहा कि इस विधेयक से उन लोगों को अधिकार मिलेगा जो 75 साल से अधिकारों से वंचित थे।

कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने दावा किया कि एससी और एसटी के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ रहे हैं और एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून का सही ढंग से अमल नहीं हो रहा है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सरकारी विभागों में एससी और एसटी के कोटे के रिक्त पदों को भरा जाए। सुरेश ने कहा कि दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया जाए।

First Published : February 6, 2024 | 8:25 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)