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नहीं रहे न्यायपालिका के ‘भीष्म पितामह’ फली एस नरीमन

वर्ष 1942 में जापान की ओर से आक्रमण किए जाने के बाद फली एस नरीमन का परिवार भारत आ गया। उस समय नरीमन 12 साल के थे।

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भाषा   
Last Updated- February 21, 2024 | 11:06 PM IST

कानून विशेषज्ञ एवं दिग्गज अधिवक्ता फली एस नरीमन का बुधवार को 95 वर्ष की आयु में यहां निधन हो गया। वह हृदय संबंधित परेशानियों सहित कई बीमारियों से जूझ रहे थे। नरीमन का जन्म 10 जनवरी 1929 को रंगून (अब यांगून) में एक संपन्न कारोबारी परिवार में हुआ था। वर्ष 1942 में जापान की ओर से आक्रमण किए जाने के बाद उनका परिवार भारत आ गया। उस समय नरीमन 12 साल के थे। उन्होंने 70 वर्षों से अधिक समय तक वकालत की।

उन्होंने नवंबर 1950 में बंबई उच्च न्यायालय से वकालत शुरू की। नरीमन को मई 1972 में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने 26 जून 1975 को आपातकाल लागू होने के एक दिन बाद पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने लंबे और शानदार कानूनी करियर में नरीमन ने भोपाल गैस त्रासदी समेत कई ऐतिहासिक मामलों में पैरवी की।

भारतीय न्यायपालिक के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले नरीमन ने ‘बिफोर द मेमरी फेड्स’, ‘द स्टेट ऑफ द नेशन’, ‘इंडियाज लीगल सिस्टम: कैन इट बी सेव्ड?’ और ‘गॉड सेव द ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट’ जैसी किताबें भी लिखीं। नरीमन को जनवरी 1991 में पद्म भूषण और 2007 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। नवंबर 1999 में उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी मनोनीत किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने नरीमन के निधन पर बुधवार को शोक व्यक्त किया और कहा कि वह ‘एक महान बुद्धिजीवी थे।’ वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘फली नरीमन का निधन एक युग का अंत है।’ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी शोक व्यक्त किया।

First Published : February 21, 2024 | 11:06 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)