भारत

Groundwater: जमीन के नीचे के पानी का तापमान इस सदी के अंत तक 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है

भूजल में सबसे ज्यादा तापमान की बढ़ोतरी मध्य रूस, उत्तरी चीन और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों और दक्षिण अमेरिका के Amazon वर्षावन में हो सकती है।

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- June 05, 2024 | 4:25 PM IST

एक नए शोध में पाया गया है कि इस सदी के अंत तक भूजल (Groundwater) का तापमान 2-3.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इससे पानी की क्वालिटी और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, साथ ही इससे जुड़े ईकोसिस्टम को भी खतरा हो सकता है। “दुनिया के पहला वैश्विक भूजल तापमान मॉडल” ने भविष्यवाणी की है कि भूजल में सबसे ज्यादा तापमान वृद्धि मध्य रूस, उत्तरी चीन और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों और दक्षिण अमेरिका के Amazon वर्षावन में हो सकती है।

जर्मनी के कार्सलरुहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने जलवायु परिवर्तन को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर अब तक ज्यादातर ध्यान मौसम की घटनाओं और पानी की उपलब्धता पर दिया जाता रहा है, लेकिन यह भी विचार करने की जरूरत है कि जलवायु परिवर्तन का भूजल पर क्या प्रभाव पड़ता है, जो धरती पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि भूजल का गर्म होना उन ईकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है जो भूजल पर निर्भर करते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूकैसल, UK के इस अध्ययन के सह-लेखक गेब्रियल राउ ने बताया, “सूखे के समय नदियां बहती रहने के लिए भूजल पर निर्भर करती हैं। गर्म पानी में कम घुली हुई ऑक्सीजन होती है।”

अध्ययन के अनुसार, अनुमान लगाया गया है कि साल 2100 तक दुनिया भर में 60 से 600 मिलियन लोग ऐसे इलाकों में रह सकते हैं, जहां भूजल का तापमान किसी भी देश द्वारा निर्धारित पीने के पानी के तापमान की सबसे ऊपरी सीमा से अधिक हो जाएगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अभी तक केवल 125 देशों में से 18 के पास ही पीने के पानी के तापमान के लिए दिशानिर्देश हैं। शोधकर्ता राउ ने बताया कि गर्म भूजल से बीमारी पैदा करने वाले जीवाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पीने के पानी की क्वालिटी और लोगों के जीवन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा, “यह उन इलाकों में विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां पहले से ही साफ पीने के पानी की कमी है और जहां भूजल का बिना उपचार के सेवन किया जाता है।”

पानी में गर्मी कैसे फैलती है, इस आधार पर शोधकर्ताओं ने मौजूदा भूजल तापमान का मॉडल बनाया और साथ ही दुनिया भर में 2000-2100 के बीच होने वाले बदलावों का भी अनुमान लगाया। भूजल पृथ्वी की सतह के नीचे चट्टानों और मिट्टी में मौजूद छिद्रों में पाया जाता है।

अध्ययन के लेखकों ने नेचर जियोसाइंस जर्नल में प्रकाशित शोध में लिखा है, “हमारे अध्ययन में पाया गया है कि (permafrost क्षेत्रों को छोड़कर) भूजल जल स्तर की गहराई पर मध्यम एमिशन के तहत 2000 से 2100 के बीच औसतन 2.1 डिग्री सेल्सियस गर्म होने का अनुमान है।” (PTI के इनपुट के साथ)

First Published : June 5, 2024 | 4:25 PM IST