अब मुंबई से पुणे की दूरी सिर्फ 25 मिनट में तय की जा सकती है, वह भी 1,000 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार वाली हाइपरलूप पॉड में सफर करके। यह भविष्य की एक अनोखी तकनीक है, जिसे आईआईटी मद्रास की टीम ने साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
भारत की पहली हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक तैयार
आईआईटी मद्रास ने हाल ही में 410 मीटर लंबी हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक का निर्माण पूरा कर लिया है। यह भारत में हाइपरलूप तकनीक पर किया गया पहला बड़ा प्रयोग है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए ट्रैक का वीडियो भी साझा किया। उन्होंने लिखा, “भारत की पहली हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक (410 मीटर) पूरी हुई। टीम रेलवेज, आईआईटी मद्रास के अविष्कार हाइपरलूप ग्रुप और TuTr स्टार्टअप को बधाई।”
कैसे हो रहा है काम?
यह प्रोजेक्ट आईआईटी मद्रास के अविष्कार हाइपरलूप ग्रुप और TuTr (आईआईटी में शुरू हुआ एक स्टार्टअप) के सहयोग से चल रहा है। इसमें 76 छात्र और शोधकर्ता काम कर रहे हैं।
हाइपरलूप सिस्टम दो चरणों में तैयार होगा
पहला चरण: 11.5 किमी लंबा टेस्ट ट्रैक बनाया जाएगा, जिससे सिस्टम की क्षमता और विश्वसनीयता साबित होगी।
दूसरा चरण: टेस्ट ट्रैक को 100 किमी तक बढ़ाया जाएगा, जिससे इसे असली दुनिया में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सके।
मुंबई-पुणे हाइपरलूप प्रोजेक्ट
मुंबई-पुणे कॉरिडोर को भारत के पहले हाइपरलूप प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। यह प्रोजेक्ट सफल हुआ तो मुंबई से पुणे का सफर सिर्फ 25 मिनट में पूरा होगा, जो फ्लाइट से भी तेज होगा।
पुणे की स्टार्टअप Quintrans Hyperloop 2027-28 तक अपना पहला कार्गो हाइपरलूप सिस्टम लॉन्च करने की तैयारी में है। यह तकनीक मुंबई-पुणे, चेन्नई-बेंगलुरु, और दिल्ली-चंडीगढ़ जैसे शहरों के बीच हाई-स्पीड कनेक्टिविटी लाने का वादा करती है।
टिकट की कीमत और फायदे
यात्रा का समय: 25 मिनट से भी कम।
टिकट की कीमत: 1,000 से 1,500 रुपये (फ्लाइट टिकट की आधी कीमत)।
फायदे: समय की बचत, ऊर्जा कुशलता और पर्यावरण के लिए अनुकूल।
हाइपरलूप क्या है?
हाइपरलूप एक हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसमें पॉड्स (एक प्रकार के प्रेशराइज्ड वाहन) कम दबाव वाली ट्यूब्स में सफर करते हैं। यह तकनीक एलन मस्क ने 2012 में शुरू की थी।
स्पीड: 1,100 किमी/घंटा तक।
डिजाइन: वैक्यूम-सील्ड ट्यूब्स में काम करता है, जिससे घर्षण कम होता है और ऊर्जा की खपत भी।
क्षमता: हर पॉड में 24-28 यात्री सफर कर सकते हैं।
यह तकनीक परिवहन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है और भारत को भविष्य की यात्रा में एक कदम आगे ले जा सकती है।