अधिकारियों ने इस सप्ताह राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत 46 टन एक बार इस्तेमाल वाले प्लास्टिक के उत्पाद (एसयूपी) जब्त किए। इस क्रम में 41 लाख रुपये के चालान जारी किए गए। यह प्लास्टिक देश में प्रदूषण का महत्त्वपूर्ण स्रोत है। पर्यावरण मंत्रालय ने जारी बयान बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अभियान 17 से 19 अक्टूबर तक अभियान चलाया था।
इसमें 4,000 से अधिक उल्लंघनकर्ताओं के बारे में जानकारी मिली। इस दौरान 2,900 से अधिक चालान (जुर्माने के कागजात) जारी किए गए थे। इस क्रम में 50 से अधिक जांच दलों ने सब्जी, फल व मछली मार्केट और गली मोहल्लों में सामान बेचने वालों का निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण कार्रवाई में राज्य शहरी विकास विभाग के अधिकारीगण भी शामिल थे।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी), प्रदूषण नियंत्रण समितियों (पीसीसी) ने भी ऐसी कार्रवाइयां कीं ताकि एक बार इस्तेमाल वाले प्लास्टिक की आपूर्ति श्रृंखला बाधित की जा सके। बयान के मुताबिक, ‘एक बार इस्तेमाल वाले प्लास्टिक के उत्पाद बनाने वाले खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं और कारखानों के बारे में जानकारी मिली। निरीक्षण के दौरान व्यापक स्तर पर प्रतिबंधित उत्पाद जब्त किए गए।’ राज्यों के बीच ऐसे प्लास्टिक की आवाजाही रोकने के लिए राज्यों की सीमाओं का भी निरीक्षण किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2019 को स्वतंत्रता दिवस पर दिए अपने भाषण में लोगों से एक बार इस्तेमाल वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकने का अनुरोध किया था। यह आग्रह फिर रेडियो पर प्रसारित ‘मन की बात’ में भी किया गया था। पर्यावरण मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने अगस्त 2022 में लोकसभा में बताया था कि भारत में 2019-20 के दौरान सालाना करीब 34.7 लाख टन प्लास्टिक अपशिष्ट था।
भारत ने 1 जुलाई को एक बार इस्तेमाल वाले प्लास्टिक के 19 उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इनमें ईयरबड, झंडे, टॉफी और आइसक्रीम की डंडियां, पॉलिस्टाइनिन (थर्मोकोल), प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ आदि थे। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत 75 माइक्रोन से पतले थैले पर प्रतिबंध लगा दिया गया। 31 दिसंबर से इस थैले की मोटाई बढ़ाकर 120 माइक्रोन कर दी जाएगी।