सेना के लिए ‘अग्निपथ प्रवेश योजना’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 6:17 PM IST

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक नई भर्ती योजना की घोषणा की जिसे ‘अग्निपथ प्रवेश योजना’ का नाम दिया गया है। सरकार द्वारा एक ‘परिवर्तनकारी सुधार’ के रूप में पेश इस योजना के बाद सशस्त्र बलों की औसत आयु में 4-5 वर्ष की कमी आने का अनुमान है। योजना के तहत युवाओं को सशस्त्र बलों में चार वर्ष के कार्यकाल के लिए भर्ती किया जाएगा और इन्हें फिल्मी अंदाज में ‘अग्निवीर’ का नाम दिया गया है। इस वर्ष 46,000 अग्निवीरों की भर्ती की जानी है। आने वाले वर्षों में भी प्राय: इतनी ही तादाद में भर्तियां की जाएंगी। यानी अग्निवीरों के पहले बैच के सेवानिवृत्त होने तक 1,84,000 युवाओं की भर्ती हो चुकी होगी।
अग्निवीरों के प्रत्येक बैच में से सरकार सर्वश्रेष्ठ जवानों को बरकरार रखेगी। हर वर्ष 25 प्रतिशत जवानों यानी 11,500 अग्निवीरों को सेवा में बने रहने के लिए चुना जाएगा।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘अल्पकालिक सैन्य सेवा राष्ट्र, समाज और देश के युवाओं के लिए अत्यंत लाभदायक होगी। इसमें देशभक्ति, मिलजुलकर काम करने की भावना बढ़ेगी, शारीरिक चुस्तीफुर्ती में इजाफा होगा, देश के प्रति निष्ठा और किसी बाहरी या आंतरिक चुनौती तथा प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता होगी।‘
हालांकि विपक्ष ने अग्निपथ योजना की आलोचना करते हुए कहा है कि यह योजना बेरोजगारी की समस्या को बढ़ाएगी। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘जो हजारों युवा हर वर्ष सेवा से बाहर होंगे उनके लिए क्या रोजगार होगा? सरकार आज भी लाखों योग्य युवाओं को रोजगार नहीं दिला पा रही है। ऐसे में सेवानिवृत्त अग्निवीर जो हथियार चलाने में कुशल होंगे और जिनके पास कोई रोजगार नहीं होगा वे कानून व्यवस्था के लिए समस्या हो सकते हैं, संभव है कि वे हथियारबंद निजी दस्तों में शामिल हो जाएं।’
हालांकि कुछ वरिष्ठ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों का कहना है कि अल्पकालीन सेवा का मॉडल अपनाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है क्योंकि इससे लागत कम होगी और हथियारों के लिए अधिक धनराशि बचेगी। सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एच एस पनाग कहते हैं, ‘दूसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत के समय भारतीय सेना में केवल दो लाख जवान थे। युद्ध के दौरान इसमें 25 लाख जवान हुए और सन 1946 तक इसे तीन लाख जवानों तक सीमित कर दिया गया। इससे पता चलता है कि सैनिकों को अल्पावधि के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है और जरूरत तथा बजट के अनुसार जवानों की तादाद को बढ़ाया या घटाया जा सकता है।’
अग्निपथ को वित्तीय सहायता
पहले वर्ष में अग्निवीरों को 30,000 रुपये प्रति माह का पैकेज दिया जाएगा जिसमें हर वर्ष इजाफा किया जाएगा और चौथे वर्ष यह राशि 40,000 रुपये हो जाएगी। इसके अलावा तीनों सेनाओं के अनुसार जोखिम और कठिनाई भत्ते भी दिए जाएंगे।
सेवा काल के दौरान उनके वेतन का 30 प्रतिशत (पहले वर्ष में 9,000 रुपये प्रति माह जो चौथे वर्ष तक बढ़कर 12,000 रुपये प्रतिमाह जाएगी) हिस्सा तथाकथित ‘अग्निवीर कोर फंड’ में जाएगा।
चौथे वर्ष के अंत तक हर अग्निवीर के कोर फंड में 5.02 लाख रुपये होंगे। सरकार इसमें इतनी ही राशि मिलाएगी। इस राशि को मिलाकर अग्निवीरों को ‘सेवा निधि पैकेज’ के रूप में करीब 11.71 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। उन्हें इस पर मिलने वाला ब्याज भी दिया जाएगा। यह राशि आयकर से मुक्त होगी। इन जवानों को ग्रैच्युटी या पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अग्निवीरों को सेवाकाल के दौरान 48 लाख रुपये का बीमा मुहैया कराया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि यह योजना अधिक युवा और तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को सैन्य बलों में लाएगी और वहां युवा तथा अनुभवी सैनिकों का एक बेहतर संतुलन कायम होगा।

First Published : June 15, 2022 | 12:29 AM IST