भारत के नियंत्रक एवं महा लेखा परीक्षक (सीएजी) ने शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) का ऑडिट करने का फैसला किया है, जिससे इन प्राधिकरणों के प्रदर्शन को राज्य अधिनियमों और 1990 की शुरुआत में किए गए 74वें संविधान संशोधन के मुताबिक प्रदर्शन सुनिश्चित हो सके। सूत्रों ने कहा कि संशोधनों को लागू करने की ऑडिट करने का मकसद इन निकायों के समग्र प्रदर्शन का आकलन है। राज्यों में की जाने वाली ऑडिट संशोधन के प्रावधानों और यूएलबी को लेकर राज्य के अधिनियमों के साथ इसके लिए तैयार किए गए नियमों व नियमावली के मुताबिक होगी।
सूत्रों का कहना है कि मजबूस संस्थागत ढांचे के साथ कामकाज का विभाजन व हस्तांतरण, धन व कामकाज इस आकलन का प्रमुख क्षेत्र होगा। उन्होंने कहा कि यूएलबी को वित्तीय अनुदान वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक मिलता है। एक सूत्र ने कहा, ‘सीएजी ऑडिट में इस तरह के अनुदानों का उपयोग देखा जाता है।’
15वें वित्त आयोग और थिंक टैंकों की ओर से कराए गए अध्ययन के मुताबिक कुछ राज्यों को छोड़ दें तो ज्यादातर राज्यों के वित्त आयोग (एसएफसी) ने इन निकायों की अकुशलता और राज्य सरकार को ताकत न होने की बात कही है। वहीं तमाम राज्यों ने 5 साल की अवधि बीतने के बाद नया एसएफसी नहीं बनाया है।
इसकी वजह से धन का प्रवाह प्रभावित होता है। साथ ही स्थानीय निकायों की शक्तियों के विभाजन पर भी असर पड़ता है। 2021-26 के लिए अपनी रिपोर्ट में 15वें वित्त आयोग ने कहा था, ‘म्युनिसिपलिटी और अन्य स्थानीय सरकारों को कर दिए जाने की सिफारिश करने और राज्यों व उनकी म्युनिसिपलिटी के बीच संबंधों में एसएफसी की बहुत अहम भूमिका होती है।’
कुछ शहरी निकायों जैसे सूरत को सीएजी ऑडिट की जरूरत है, क्योंकि वे बॉन्ड के माध्यम से धन जुटाना चाहते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस बार ऑडिट में समग्र अध्ययन किया जाएगा, जो कुछ खास पहलों तक सीमित नहीं रहेगी।
एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘संशोधन का मकसद क्या था? क्या उस मकसद को पूरा किया गया या नहीं, सीएडी इसके कुछ पहलुओं के निर्धारित करेगा।’