मापण्ना मल्लिकार्जुन खरगे अब कांग्रेस के नए अध्यक्ष बन गए हैं। पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में 9,385 मतदाताओं ने हिस्सा लिया जिनमें से 7,897 मत खरगे को मिले जबकि उनके प्रतिस्पर्द्धी शशि थरूर 1,072 मतों के साथ उनसे काफी पीछे रह गए। इसके अलावा 416 मतों को खारिज कर दिया गया। पिछले 20 से अधिक वर्षों में खरगे पहले गैर-गांधी परिवार के पार्टी अध्यक्ष बने हैं।
पहले भी कई लोगों ने खरगे की जीत का अनुमान लगाया था लेकिन पार्टी के सांसद राहुल गांधी ने साफतौर पर थरूर के बजाय खरगे की जीत की उम्मीद पहले ही जता दी।
वह इन दिनों आंध्र प्रदेश में ‘भारत जोड़ो’ पदयात्रा पर हैं। संवाददाताओं के साथ बातचीत के दौरान राहुल ने कहा कि पार्टी में उनकी भूमिका क्या होगी इसका फैसला भी नवनिर्वाचित अध्यक्ष ही करेंगे। उन्होंने कहा कि खरगे ही इसका फैसला लेंगे। हालांकि उस संवाददाता सम्मेलन के वक्त अध्यक्ष पद के चुनावी नतीजे घोषित नहीं हुए थे, ऐसे में उन्होंने तुरंत भूल सुधार करते हुए कहा, ‘जो भी अध्यक्ष चुने जाएंगे, वही इस बात का फैसला करेंगे।’
राहुल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ही पार्टी में फैसला करने वाले शीर्ष व्यक्ति होते हैं ऐसे में जो कोई भी इस पद के लिए चुना जाएगा उसे ही भविष्य में पार्टी की रूपरेखा तय करनी होगी। उनसे संवाददाताओं ने पूछा कि क्या वह नए अध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे तब उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल’। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नए अध्यक्ष ही यह फैसला करेंगे कि पार्टी में उनकी भूमिका क्या होगी और उन्हें कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी।
यह चुनाव भी विवादों से अछूता नहीं रहा। थरूर के चुनाव प्रबंधक ने पार्टी की चुनाव समिति पर उत्तर प्रदेश में हुए चुनाव को लेकर अनियमितता के बेहद गंभीर आरोप लगाए और उन्होंने यह मांग की कि राज्य के सभी मतों को खारिज कर दिया जाए। इसी तरह के आरोप पंजाब और तेलंगाना के लिए भी लगाए गए।
कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री को लिखे गए पत्र में थरूर के मुख्य चुनाव एजेंट सलमान सोज ने कहा कि सभी तथ्य इस ओर इशारा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में पूरी चुनाव प्रक्रिया विश्वसनीयता से परे थी।
सोज ने अपने पत्र में कहा, ‘हम इस बात को रेखांकित करते हुए कहना चाहते हैं कि हमारे पास इस बात के कोई साक्ष्य नहीं हैं कि मल्लिकार्जुन खरगे को इस बात की जानकारी होगी कि कैसे उनके समर्थक उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया में धांधली में लिप्त हैं। हमें पूरा भरोसा है कि अगर उन्हें इस बात की जानकारी होती तब वह इसकी अनुमति कभी नहीं देते।’
कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता संजय झा ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हुए। उन्होंने कहा, ‘खरगे को 88 प्रतिशत मत मिले और यह इस बात का सबूत है कि नवनिर्वाचित कांग्रेस अध्यक्ष को अलाकमान की सहमति हासिल थी। अब इसके आगे किसी भी टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है।’
हालांकि अध्यक्ष पद के चुनावी नतीजे की घोषणा के बाद थरूर की मुलाकात खरगे से हुई और उन्होंने कहा कि वह नए अध्यक्ष के साथ मिलकर काम करेंगे। खरगे ने भी इसी तरह की परस्पर भावना जाहिर की। निवर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नतीजे की घोषणा के बाद सबसे पहले खरगे से बात कर सहयोग देने की पेशकश की।
खरगे के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। उन्हें न केवल कांग्रेस के संगठन चुनाव सुनिश्चित कराने होंगे जिसमें कार्यसमिति के चुनाव भी शामिल हैं बल्कि उन्हें इस योजना पर भी काम करना होगा कि पार्टी आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर पाए जिनमें हिमाचल प्रदेश, गुजरात के साथ-साथ 2023 में 11 अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव शामिल हैं।
उन्हें पार्टी की राज्य इकाई में भी बड़े पैमाने पर बदलाव लाने होंगे जो एक मुश्किल कदम साबित हो सकता है। वह गांधी परिवार के दिशानिर्देश को कितना मानेंगे यह उनके अध्यक्ष पद पर बने रहने के दौरान मुख्य मुद्दा होगा।