मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ दिल्ली में मुश्किल से कुछ घंटे बिताने के बाद भोपाल लौट गए। इस तरह वह राजस्थान कांग्रेस में मचे घमासान के बीच दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच मध्यस्थता करने से बच गए। सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए के एंटनी को पार्टी नेतृत्व के मुद्दे को सुलझाने में मदद करने के लिए दिल्ली आने के लिए कहा गया।
दूसरी तरफ पार्टी के कोषाध्यक्ष पवन बंसल ने नामांकन पत्रों के दो सेट ‘किसी और के लिए’ एकत्र किए। इस बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने विश्वासपात्रों से कहा कि वह राजस्थान के मुख्यमंत्री पद से हटने के लिए तैयार हैं, लेकिन ‘उस गद्दार को मुख्यमंत्री नहीं बनने दूंगा’ जैसे संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी और को मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार करेंगे, लेकिन सचिन पायलट को नहीं जिन्होंने वर्ष 2020 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के लिए कांग्रेस विधायकों को लामबंद किया था।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गहलोत से बात करने की जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी और आनंद शर्मा को दी है। सीडब्ल्यूसी के एक पूर्व सदस्य ने कांग्रेस में संकट की गंभीरता का संकेत देते हुए कहा, ‘अगर आज रात चीजें नहीं सुलझीं, तब अध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया की तारीख आगे बढ़ानी पड़ सकती है। 30 सितंबर की शाम तक ही संभावित उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकते हैं।’
पार्टी में उपजी भ्रम की स्थिति को और बढ़ाते हुए सचिन पायलट दिल्ली पहुंचे। हालांकि उन्हें बुलाया गया था या वह खुद दिल्ली आए थे, यह स्पष्ट नहीं है। खबर लिखे जाने तक उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने का समय नहीं दिया गया था। पर्यवेक्षकों की टीम जो पिछले सप्ताहांत जयपुर गई थी उनका ‘बहिष्कार’ विद्रोही विधायकों ने किया गया था।
पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक के समानांतर विधायकों की अलग बैठक बुलाया जाना ‘घोर अनुशासनहीनता’ है और इसके लिए मुख्य सचेतक महेश जोशी समेत तीन नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस टीम ने सिफारिश की है कि शांति धारीवाल सहित तीन बागियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। ये तीनों नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाते हैं।
सूत्रों ने बताया कि पर्यवेक्षकों की इस रिपोर्ट में मुख्यमंत्री गहलोत का सीधे तौर पर कोई हवाला नहीं दिया गया है। अगर पार्टी आलाकमान कार्रवाई करता है, तब गहलोत को उन लोगों का बचाव करने के लिए कदम उठाना होगा जिन्होंने उनके लिए खुद को दांव पर लगाया है।
कांग्रेस में अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अब तक एकमात्र मजबूत उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल के सांसद शशि थरूर हैं जो पद कभी जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस और स्वतंत्रता संग्राम के अन्य सेनानियों को मिला था। थरूर संभवतः पार्टी के 30 सदस्यों के समर्थन के साथ अपना नामांकन पत्र शुक्रवार को दाखिल करेंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है जिनमें कमलनाथ, मल्लिकार्जुन खड़गे और मुकुल वासनिक के नाम प्रमुख हैं। कमलनाथ ने अपने समर्थकों से कहा है कि वह मध्य प्रदेश पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं क्योंकि कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं जिन्हें अध्यक्ष बनने का फैसला करने पर अपना पद छोड़ना होगा।