क्या आप जानते हैं ESI स्कीम से मिलने वाले फायदों के बारे में?

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:50 PM IST

 कम आय वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (Employees State Insurance Corporation-ESIC) की तरफ से ईएसआई स्कीम चलाई जाती है। इस स्कीम के जरिए इलाज में होने वाले खर्चों का बोझ कम करने में कर्मचारी को मदद मिलती है।

इन कर्मचारी को मिलता है ESI स्कीम का लाभ

ईएसआई स्कीम का फायदा उन कर्मचारियों को मिलता है जिनकी मासिक सैलरी 21 हजार या इससे कम होती है। वहीं जो कर्मचारी शारीरक रूप से अक्षम हैं उनके लिए मजदूरी सीमा 25000 रुपये महीना है।

बता दें कि ESI स्कीम में नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों का ही योगदान होता है। 

कितना होता है नियोक्ता और कर्मचारी का ESI स्कीम में योगदान

आपको बता दें कि नियोक्ता की ओर से कर्मचारी की सैलरी के 4.75 फीसदी और कर्मचारी की तरफ से सैलरी का 1.75 फीसदी का योगदान होता है। 

आइए, जानते है ESI स्कीम से मिलने वाले फायदों के बारे में…

इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए लोगों को एक ESI कार्ड जारी किय जाता है। ESI कार्ड के जरिए या फिर कंपनी के दस्तावेज के जरिए कर्मचारी ESI हॉस्पिटल में या डिस्पेंसरी में अपना इलाज मुफ्त में करा सकते हैं। बता दें कि देश में ESI के 150 से भी अधिक अस्पताल हैं, जहां पर हर तरह की बीमारी का इलाज कराने की सुविधा दी जाती है। 

बता दें कि ईएसआई योजना से कर्मचारी को मुफ्त इलाज कराने का फायदा मिलता है। साथ ही बीमित व्यक्ति के अलावा उस पर निर्भर रहने वाले परिवार के सदस्यों का भी इलाज फ्री में हो जाता है। बता दें कि बीमाकृत व्यक्ति और उसके परिजनों के उपचार पर व्यय की कोई अधिकतम सीमा नहीं होती है।

जा कर्मचारी रिटायर हो जाते हैं या स्‍थायी रूप से अपंग हो जाते हैं, उस बीमाकृत व्‍यक्ति को और उसके जीवनसाथी को 120 रुपए के वार्षिक प्रीमियम पर चिकित्सा दी जाती है। इसके अलावा बीमित व्यक्ति को बीमारी के दौरान छुट्टी के लिए 91 दिनों के लिए नकद भुगतान किया जाता है। बता दें कि ये भुगतान 70 फीसदी की दर से मिलता है।

यदि किसी बीमित व्यक्ति की रोजगार के दौरान मृत्‍यु हो जाए तो उसके अंतिम संस्कार के लिए मूल व्यय या अधिकतम 10 हजार रुपए तक की राशी दी जाती है। इसके अलावा आश्रितों को नियत अनुपात में मासिक पेंशन दी जाती है। आपको बता दें कि पेंशन को 3 भागों में बांटा गया है- पहला बीमित व्यक्ति की पत्नी, दूसरा बच्‍चों और तीसरा उसके माता-पिता की पेंशन।

टेंपरेरी डिसेबिलिटी की स्थिति में बीमित व्यक्ति को पूरी तरह स्‍वस्‍थ होने तक और परमानेंट डिसेबिलिटी की स्थिति में पूरे जीवनभर मासिक पेंशन भी दीजाती है।

First Published : October 12, 2022 | 10:31 AM IST