टायर से मिली ड्रैगन को रफ्तार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 3:42 AM IST

महंगाई की मार झेलती भारतीय टायर निर्माता कंपनियों को इस क्षेत्र में भी अब चीनी कंपनियों से चुनौती मिल रही है।


भारतीय टायर निर्माता कंपनियां प्राकृतिक रबड़, कच्चे तेल ओर कार्बन ब्लैक जैसे कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। चीन से आयात किए गए टायरों की संख्या का दोगुना हो जाना भारतीय कंपनियों की परेशानी को और बढ़ा रहा है।

ऑटोमेटिव टायर मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (एटीएमए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चीनी टायरों का आयात करने वाले देशों की सूची में भारत तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। जबकि साल 2002-03 में भारत इस सूची में 39वें स्थान पर था। एसोसिएशन के मुताबिक, अगर ऐसे ही हालात रहे तो भारत जल्द ही इस सूची में पहले स्थान पर पहुंच सकता है।

वित्त वर्ष 2007-08 के दौरान चीन से आयात किए गए टायरों की संख्या पिछले वित्त वर्ष से दोगुनी होकर 12 लाख टायर हो गई है। वित्त वर्ष 2006-07 के दौरान 6.6 लाख टायरों का  ही आयात किया गया था। भारत में पुराने टायरों को बदलकर नए टायर लगाने का  सालाना कारोबार लगभग 7800 करोड़ रुपये का है। इस बाजार में चीनी टायरों की हिस्सेदारी लगभग 15 फीसदी है।

कार, ट्रक,युटिलीटी व्हीकलस (युवी), ओटीआर और बसों के टायर का कारोबार लगभग 20,000 करोड़ रुपये का है। भारतीय टायर बाजार में इस क्षेत्र के एमआरएफ, अपोलो, ब्रिजस्टोन, सिएट, जेके टायर्स और मिकेलिन गुडईयर जैसे दिग्गज मौजूद हैं। एमआरएफ के उपाध्यक्ष (विपणन) कोशी वर्गिस ने कहा, ‘पुराने टायरों को बदलकर नए टायर लगाने के कारोबार का 15 फीसदी हिस्सा चीनी कंपनियों के पास चला गया है, जबकि यह हमारा हो सकता था।

चीन में बने ये सस्ते टायर भारत में आसानी से आयात किये जाते हैं। इन टायरों को भारतीय बाजार में स्थानीय टायरों के मुकाबले लगभग 30 फीसदी कम कीमतों पर बेचा जाता है। भारतीय खरीदार इन टायरों को इनके सस्ते दामों की वजह से ही खरीदते हैं। इन टायरों के निर्माण में इस्तेमाल की गई तकनीक से उनका कोई वास्ता नहीं होता है। लेकिन लगातार बढ़ती उत्पाद लागत के कारण हम अपने उत्पादों की कीमत भी नहीं घटा सकते हैं।’

उद्योग सूत्रों के मुताबिक भारत में बने टायर गुणवत्ता और निर्माण में इस्तेमाल की गई तकनीक में चीनी टायरों से कई गुना बेहतर होते हैं लेकि न इनकी कीमतों में कमी नहीं लाई जा सक ती है। एक उद्योग विशेषज्ञ के मुताबिक, ‘भारत में चीनी टायरों के खरीदार भी यह बात जानते हैं लेकिन कम कीमत होने के कारण भारतीय बाजार में इन टायरों की मांग बराबर बनी रहेगी।’एटीएमए भारत में चीनी टायरों के आयात पर रोक लगाने के लिए वाणिज्य मंत्रालय के सामने दो बार याचिका भी दायर कर चुकी है।

First Published : June 4, 2008 | 10:05 PM IST