रेलमंत्री लालू प्रसाद दुनिया को यह बताने से कभी नहीं चूके कि कैसे उन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल के दौरान बिना किराए में बढ़ोतरी किए रेलवे के खाली खजाने को भरा।
हालांकि इस कवायद में मैनेजमेंट गुरु लालू प्रसाद ने सोची समझी रणनीति और बड़ी चतुराई से काम लिया। इससे रेल यात्रियों की संख्या में पिछले चार सालों के दौरान सालाना 10-15 फीसदी का इजाफा हुआ है।
इसी वजह से रेलवे को अतिरिक्त पैसा बनाने में मदद मिली। वहीं लालू ने कुछ ऐसे प्रावधान शुरू किए, जिससे रेलवे को अच्छी आमदनी का जरिया मिल गया। इनमें से एक है सीट आरक्षण में तत्काल की सुविधा।
इस सुविधा से रेलवे को मूल किराए के अलावा, प्रति टिकट 75-300 रुपये की आमदनी होती है। पिछले तीन सालों के दौरान लालू प्रसाद ने ट्रेनों में तत्कालों सीटों की संख्या बढ़ाकर लगभग दोगुनी कर दी। इससे रेलवे तो मालामाल हुआ, लेकिन आम यात्रियों को सस्ती टिकट मिलने के अवसर कम हो गए।
वर्ष 2005-06 में तत्काल सीटों की संख्या रोजना औसतन 43,000 थी, जिसे 2006-07 में बड़ी चतुराई से रेलमंत्री ने बढ़ाकर 57,000 कर दिया। वहीं 2007-08 में इसकी संख्या बढ़ा कर 98,000 कर दी गई।
इससे रेलवे को 2006-07 में जहां तत्काल टिकटों से 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई, वहीं 2007-08 में यह आंकड़ा बढ़कर 396 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। पिछले चार सालों के दौरान रेलवे ने 210 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट वर्ग में तब्दील किया है।
जिससे रेलवे प्रति टिकट 15 रुपये अतिरिक्त वसूलती है। इस कवायद से वर्ष 2007-08 में रेलवे को 114 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है।
इसके अलावा, माल ढुलाई से भी रेलवे को मुनाफा हुआ है। रेलवे ने विभिन्न जिंसों को अलग-अलग श्रेणियों में बांट कर उसका किराया तय किया है। यही नहीं, रेलवे खास जिंसों की ढुलाई पर व्यस्तता शुल्क भी वसूलती है, जिससे रेलवे को काफी आमदनी हो रही है।
जबकि रेलमंत्री ने बड़ी चतुराई से रेल बजट पेश करते हुए कहा था कि उन्होंने माल भाड़ा में भी कोई वृद्धि नहीं की है। इसके साथ ही रेलवे ने वैगन की ढुलाई क्षमता में भी 2 से 8 टन की वृद्धि की है।