फेड के पूर्व चेयरमैन सहित तीन को अर्थशास्त्र का नोबेल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:53 PM IST

फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन बेन एस बर्नान्के और दो अन्य अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को इस बार अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए चुना गया है। उन्हें ‘बैंकों और वित्तीय संकट पर शोध’ के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। रॉयल स्वीडिश अकैडमी ऑफ साइंसेज में नोबेल समिति ने बेन एस बर्नान्के, डगलस डब्ल्यू डायमंड और फिलिप एच डायबविग को अर्थशास्त्र का नोबेल देने की घोषणा की। चुने गए लोगों को 10 दिसंबर को सम्मानित किया जाएगा।
बेन बर्नान्के अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन रह चुके हैं। उन्होंने 1930 के दशक की महामंदी पर शोध किया और बताया कि यदि घबराए हुए बचतकर्ताओं ने अपनी जमा राशि निकाली तो बैंकों की हालत कितनी खतरनाक हो सकती है। 
68 साल के बर्नान्के इस समय वाशिंगटन में द ब्रुकिंग्स इंस्टिट्यूशन से जुड़े हैं। 2007-08 में अमेरिकी वित्तीय संकट के बाद बर्नान्के ने अर्थव्यवस्था को उबारने में अहम योगदान दिया था। उन्होंने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अल्पाव​धि कर्ज पर ब्याज दर को शून्य कर दिया था और फेडरल रिजर्व को बॉन्ड तथा मॉर्गेज निवेश खरीदने का निर्देया दिया था। इन कदमों से निवेशकों की घरबराहट दूर हुई।
इसी से सबक लेते हुए 2020 की शुरुआत में कोविड-19 महामारी के दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था में नरमी को देखते हुए फेडरल रिजर्व प्रमुख जेरोम पॉवेल ने अल्पाविध कर्ज पर ब्याज दर को शून्य के करीब ला दिया था और बैंकिंग तंत्र में नकदी का प्रवाह बढ़ाया था। इससे अर्थव्यवस्था को सहारा देने में मदद मिली थी।
डायमंड और डायबविग ने अल्पाव​धि ऋण को दीर्घाव​धि ऋण में बदलने की प्रक्रिया यानी परिपक्वता अव​धि में बदलाव से जुड़े जोखिम पर शोध पत्र लिखा था। शिकागो विश्वविद्यालय के 68 साल के डायमंड और सेंट लुई में वाशिंगटन यूनिर्वसिटी के 67 वर्षीय डायबविग ने अपने शोध में बताया कि कैसे जमा पर सरकारी गारंटी वित्तीय संकट को बढ़ने से रोक सकती है। 
नोबेल समिति ने कहा कि उनके शोध में बताया गया कि ‘बैंकों का पतन से बचना क्यों महत्त्वपूर्ण है।’ समिति ने कहा कि 1980 के दशक की शुरुआत में अपने शोध के साथ इन अर्थशास्त्रियों ने वित्तीय बाजारों को विनियमित करने और वित्तीय संकट से निपटने की नींव रखी। अर्थशास्त्र में नोबेल समिति के अध्यक्ष टोरे एलिंगसन ने कहा, ‘पुरस्कार विजेताओं की अंतर्दृष्टि ने गंभीर संकट और भारी-भरकम राहत पैकेज, दोनों से बचने की हमारी क्षमता में सुधार किया है।’ 
डायमंड ने कहा कि नोबेल सम्मान मिलना सुखद आश्चर्य की तरह है। कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के वित्तीय तंत्र पर पड़ने वाले असर के बारे में डायमंड ने कहा कि इसका वित्तीय तंत्र पर काफी कम प्रभाव पड़ेगा। इसकी वजह 2000 के दशक के संकट से मिली सीख और नियमन में सुधार है।
नोबेल सम्मान की दूसरी श्रेणियों के उलट अर्थशास्त्र के नोबेल का उल्लेख अल्फ्रेड नोबेल की 1895 की वसीयत में नहीं था। इस पुरस्कार की शुरुआत उनकी स्मृति में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने की थी। पहला सम्मान 1969 में दिया गया था। इसके तहत 1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग 9 लाख अमेरिकी डॉलर) की नकद राशि दी जाती है।
 

First Published : October 10, 2022 | 10:16 PM IST