त्योहारों का मौसम और दो प्रमुख राज्यों गुजरात और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) को तीन महीने और बढ़ाकर अक्टूबर 2022 करने की आज निर्णय किया। इसके तहत गरीब परिवारों को मुफ्त में अनाज दिया जाता है।
कोविड महामारी की पहली लहर के समय इस योजना की शुरुआत की गई थी और उसके बाद इस योजना की अवधि सात बार बढ़ाई जा चुकी है। तीन महीने के विस्तार से सरकारी खजाने पर चालू वित्त वर्ष के लिए खाद्य सब्सिडी मद के अलावा 44,762 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके तहत करीब 80 करोड़ लाभार्थियों को अतिरिक्त 1.22 करोड़ टन खाद्य्रान्न वितरित करने के लिए यह खर्च किया जाएगा।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के लाभार्थियों को हर महीने मिलने वाले मुफ्त अनाज के अलावा 5 किलोग्राम चावल या गेहूं भी देती है।
चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद में कमी पर उठाए जा रहे सवाल के बीच मुफ्त अनाज आवंटित करने की योजना को आगे बढ़ाया गया है। 1 सितंबर को केंद्र सरकार के गोदामों में करीब 6.01 करोड़ टन अनाज का भंडार था (इसमें 1.82 करोड़ टन धान भी शामिल है) जबकि हर साल 1 अक्टूबर को गोदामों में करीब 3.07 करोड़ टन अनाज रखने की जरूरत होती है ताकि इसकी किल्लत न हो। नए चावल की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होगी और केंद्र ने 5.18 करोड़ टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा है। बफर नियमों के तहत 31 मार्च तक भारत को 2.10 करोड़ टन खाद्यान्न (गेहूं और चावल) का भंडार रखने की जरूरत होती है।
केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में खाद्य सब्सिडी के लिए 2,06,831 करोड़ का बजट रखा है। मुफ्त अनाज योजना को सातवीं बार बढ़ाने से 44,762 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे पूरे वित्त वर्ष में खाद्य सब्सिडी पर करीब 3.38 लाख करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान है।