पूर्व न्यायाधीशों, वकीलों का मुख्य न्यायाधीश को पत्र

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 6:17 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के कई पूर्व न्यायाधीशों ने उत्तर प्रदेश में नागरिकों पर राज्य प्रशासन के लोगों द्वारा कानून व्यवस्था बनाए रखने की आड़ में  किए जा रहे कथित अत्याचार पर भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण को पत्र लिखा है। पत्र में मुख्य न्यायाधीश से स्वतः संज्ञान लेने एवं हस्तक्षेप करने की अपील की गई है। पहले भी कई सेवानिवृत्त अधिकारी प्रधानमंत्री को ऐसे पत्र लिख चुके हैं और कई दूसरे अधिकारी सरकार के पक्ष में इन आरोपों के खिलाफ अभियान भी चला चुके हैं मगर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की तरफ से राजनीतिक मामले उठाना एक असामान्य बात है।
पूर्व न्यायाधीशों का पत्र उस घटना के एक दिन बाद आया है जब जमीयत उलेमा-ई-हिंद ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पिछले सप्ताह हिंसात्मक विरोध प्रदर्शन करने के मामले में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। यह विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ था जब भाजपा के कुछ नेताओं ने पैगंबर मुहम्मद साहब के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। देश और विदेश में पैगंबर पर की गई टिप्पणी के बाद आक्रोश पैदा होने के बाद भाजपा ने प्रवक्ता नूपुर शर्मा को निलंबित कर दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने विरोध प्रदर्शन एवं पथराव करने के लिए लिए 300 से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। न्यायाधीशों द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि पुलिस हिरासत में लोगों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के मकान बिना किसी नोटिस के गिराए जा रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों को पकड़ कर पुलिस उन्हें पीट रही है। ये घटनाएं सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही हैं जिससे देश की आत्मा को ठेस पहुंच रही है। इस पत्र में 12 पूर्व न्यायाधीशों और वरिष्ठ कानूनविदों ने हस्ताक्षर किए हैं और शीर्ष न्यायालय से उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर तेजी से बिगड़ती कानून व्यवस्था को संभालने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को पुलिस उनकी बात कहने तक का मौका नहीं दे रही है। पत्र के अनुसार उत्तर प्रदेश राज्य प्रशासन ने ऐसे लोगों के खिलाफ हिंसात्मक कार्रवाई की खुली छूट दे दी है।
पत्र में कहा गया है कि ऐसी खबर है कि राज्य के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है ताकि दोबारा कोई व्यक्ति भविष्य में कानून अपने हाथ में नहीं ले सके। उन्होंने दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 और उत्तर प्रदेश अपराधी एवं समाज विरोधी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री की तरफ से ऐसी हिदायत के बाद पुलिस मनमाने ढंग से बर्बरता दिखा रही है और गैर-कानूनी रूप से प्रदर्शनकारियों को प्रताड़ित कर रही है।
पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के बयान के बाद 300 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं और प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियो में पुलिस हिरासत में लोगों को बेरहमी से पीटते हुए दिखाया जा रहा है। बिना किसी नोटिस के प्रदर्शन करने वाले लोगों के मकान गिराए जा रहे हैं और मुस्लिम समुदाय के लोगों को खदेड़ कर पीटा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन की यह करतूत अस्वीकार्य है और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के नाम पर नागरिकों के अधिकारों का अतिक्रमण किया जा रहा है। इससे संविधान और मौलिक अधिकारों की तौहीन हो रही है।
पत्र के अनुसार जिस तरह पुलिस और विकास अधिकारियों ने कार्रवाई की है उससे साफ है कि लोगों के मकान गिराना राज्य सरकार की दंड देने की एक प्रथा बन गई है जो पूरी तरह गलत है। पत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया गया है कि पहले भी कई मौकों पर न्यायपालिका के समक्ष ऐसी चुनौतियां आई हैं और उसने कानून के संरक्षक होने के नाते उचित पहल की है। पत्र में प्रवासी संकट पर लिए गए स्वतः संज्ञान का हवाला दिया गया है।
पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के जिन पूर्व न्यायाधीशों ने हस्ताक्षर किए हैं उनमें न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी, न्यायाधीश वी गोपाल गौडा, न्यायाधीश ए के गांगुली , न्यायाधीश ए पी शाह (दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं भारतीय विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष), न्यायाधीश के चंद्रू (मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश), न्यायाधीश मोहम्मद अनवर (कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश) शामिल हैं। इनके अलावा सर्वोच्च न्यायालय के कई वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। इनमें शांति भूषण, इंदिरा जयसिंह, चंद्र उदय सिंह, प्रशांत भूषण और आनंद ग्रोवर शामिल हैं।

First Published : June 15, 2022 | 12:32 AM IST