आतंकियों के बम धमाके से जख्मी राजस्थान का घाव अभी भरा भी नहीं था कि गुर्जरों के आंदोलन ने इसे और हरा कर दिया।
लेकिन राजस्थान के साथ-साथ इस आंदोलन का खामियाजा कई राज्यों को भी भुगतना पड़ रहा है। दिल्ली व उसके आसपास के इलाकों के लिए जहां सब्जी, फल व दूध की आपूर्ति बाधित हो रही है, वहीं पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सैकड़ों ट्रक राजस्थान की सीमा पर फंसे हैं।
जयपुर, कोटा, दौसा, अलवर जैसी जगहों की सड़कें लगभग बंद हो चुकी हैं। विदेशी सैलानियों ने भी राजस्थान का रुख करना छोड़ दिया है।
राज्यों में सूखा फल-सब्जी उद्योग
फल के मामले में राजस्थान से इस मौसम में खरबूज व तरबूज की सबसे अधिक आवक होती है। इसके अलावा पंजाब से राजस्थान के रास्ते मुंबई के लिए भी रोजाना 50-60 ट्रक खरबूजों की आपूर्ति होती है। रास्ता बंद होने के कारण न तो फलों की आवक हो रही है और न ही आपूर्ति।
आम व केले पर भी इस आंदोलन का फर्क देखने को मिला है। कर्नाटक से आने वाले आम व केले की आपूर्ति राजस्थान के रास्ते ही दिल्ली, पंजाब व उत्तर प्रदेश में की जाती है। लेकिन फिलहाल यह आपूर्ति गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, यूपी होते हुए दिल्ली व पंजाब के लिए की जा रही है। दिल्ली की मंडी में इस समय टिंडा, ग्वार, घीया, बैगन व खीरा की आवक होती है।
इसके अलावा प्याज की सबसे अधिक आवक राजस्थान से ही होती है। प्याज विक्रेता संघ के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा के मुताबिक गुर्जर आंदोलन से प्याज की आवक में 20 फीसदी की गिरावट आयी है। सब्जी के आढ़ती बलबीर सिंह ने बताया कि मंगलवार को सब्जियों की आवक बाधित हुई।
राजधानी में ठंडा पड़ा दूध
एक अनुमान के मुताबिक राजस्थान के इलाकों से दिल्ली व एनसीआर में रोजाना 4.5 लाख लीटर दूध की आपूर्ति होती है। गुर्जर आंदोलन के कारण 60 फीसदी आपूर्ति प्रभावित हुई है। मंगलवार को दिल्ली के बाजारों में इसका असर साफ तौर पर देखने को मिला।
रेलवे की रफ्तार भी हुई सुस्त
गुर्जर आंदोलन जारी रहा तो रेलवे को तगड़ा चूना लगेगा। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजीव सक्सेना के मुताबिक गुर्जर आंदोलन से रेलवे को कितना नुकसान हुआ है इस बारे में अभी कोई खुलासा नहीं किया जा सकता है। लेकिन दो दिनों से राजस्थान व राजस्थान होकर मुंबई व अन्य प्रांतों में जाने वाली कई रेलगाड़ियों को रद्द कर दिया गया। इस आंदोलन से कोटा डिवीजन का रेलमार्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
तीन राज्यों के पर्यटन पर मार
गुर्जरों के आंदोलन ने दिल्ली, आगरा व जयपुर के त्रिकोणीय पर्यटन को प्रभावित किया है। टूर आयोजित करने वाले पीयूष कोचर कहते हैं कि दूसरे देशों से आने वाले सैलानी अन्य जगह का रुख कर रहे है। अजमेर, पुष्कर व बूंदी जैसी जगहों पर भी पिछले दो दिनों से सैलानियों की संख्या बिल्कुल नहीं के बराबर है। होटल व अन्य उद्योगों पर भी असर पड़ा है।
परिवहन का भी हुआ चक्का जाम
आंदोलन से परिवहन उद्योग को भी भारी नुकसान हुआ है। जानकारी के मुताबिक इस आंदोलन से राजस्थान के ट्रांसपोर्टरों को रोजाना लगभग 5 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। जयपुर में अमूमन 2.5 हजार ट्रक रोजाना आते-जाते है। इनकी आवाजाही फिलहाल बंद हो गयी है। अगर पूरे राजस्थान की बात करे तो यहां से रोजाना लगभग 40 हजार ट्रक गुजरते हैं। राजस्थान की सीमा पर दिल्ली, पंजाब व हरियाणा के हजारों ट्रक फंसे होने की खबर है।
राजस्थान के आस-पास के कई राज्यों में प्रभावित हुई फल-सब्जी की सप्लाई
पड़ोसी राज्यों के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ी गहरी मार
रेलवे केसाथ-साथ कई राज्यों के परिवहन उद्योग को हो रहा गहरा नुकसान, हजारों की तादाद में ट्रक राजस्थान की सीमा पर फंसे